उजाला / उत्तरप्रदेश
लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) में हॉस्टल आवंटन में कथित अनियमितताओं और मेस की बदहाल व्यवस्था को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। गुरुवार को शुरू हुआ छात्रों का धरना 24 घंटे से अधिक समय तक चलने के बाद भी समाप्त नहीं हुआ। प्रदर्शनकारी छात्र हॉस्टल की खाली सीटों के आवंटन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, नई मेरिट सूची जारी करने और विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले में जवाब मांग रहे हैं। छात्रों ने आचार्य नरेंद्र देव और लाल बहादुर शास्त्री हॉस्टल में उपलब्ध संसाधनों के समुचित उपयोग की मांग भी उठाई है।
रातभर चला धरना, सरस्वती प्रतिमा के पास की नारेबाजी
हॉस्टल आवंटन को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन गुरुवार को विश्वविद्यालय परिसर में तेज हो गया। शुरुआत में प्रदर्शनकारी छात्र डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर (DSW) कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते हुए छात्र बाद में परिसर में स्थित सरस्वती प्रतिमा के पास पहुंच गए। यहां उन्होंने नारेबाजी कर हॉस्टल आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। छात्रों का विरोध रातभर जारी रहा। देर रात करीब 11 बजे प्रदर्शनकारी छात्रों ने जमीन पर बैठकर खाना खाया। इसके बाद भी उन्होंने धरना समाप्त नहीं किया। आंदोलन के जारी रहने से हॉस्टल आवंटन का मुद्दा विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
खाली सीटों के आवंटन पर छात्रों ने उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का मुख्य आरोप है कि हॉस्टल की आधिकारिक आवंटन सूची जारी होने के बाद खाली बची सीटों को भरने में पारदर्शिता नहीं बरती गई। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि इन सीटों पर विद्यार्थियों का चयन किन नियमों और मानकों के आधार पर किया गया। छात्र यह भी जानना चाहते हैं कि हॉस्टल आवंटित होने के बाद जिन विद्यार्थियों ने अपना प्रवेश निरस्त करा लिया या किसी कारण से हॉस्टल छोड़ दिया, उनकी खाली हुई सीटों पर दूसरे विद्यार्थियों को किस आधार पर कमरे दिए गए। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, इन सवालों के स्पष्ट जवाब मिलने से आवंटन प्रक्रिया को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर हो सकती है।
नई मेरिट सूची जारी करने की मांग
छात्रों ने हॉस्टल से वंचित विद्यार्थियों के लिए नई मेरिट सूची जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि कमरों का आवंटन मेरिट और विद्यार्थी के घर से विश्वविद्यालय की दूरी जैसे उचित मानकों के आधार पर होना चाहिए। इससे उन विद्यार्थियों को प्राथमिकता देने में मदद मिल सकती है, जिन्हें विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए आवास की अधिक आवश्यकता है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए मानकों को सार्वजनिक किया जाए। उनका तर्क है कि जब चयन के नियम स्पष्ट होंगे, तो विद्यार्थियों को यह समझने में आसानी होगी कि उन्हें हॉस्टल क्यों मिला या वे आवंटन से वंचित क्यों रह गए।

वेबसाइट पर हॉस्टलवार और कोर्सवार सूची की मांग
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आधिकारिक वेबसाइट पर हॉस्टलवार और कोर्सवार आवंटन सूची जारी करने की मांग की है। उनके अनुसार, सूची सार्वजनिक होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस हॉस्टल में कितने कमरे आवंटित हुए और अलग-अलग पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को किस आधार पर जगह मिली। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने सीधे प्रवेश वाले करीब 50 कोर्स के छात्रों को हॉस्टल आवंटित करने के मानक सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए भी चयन प्रक्रिया और पात्रता संबंधी नियम स्पष्ट होने चाहिए, ताकि किसी प्रकार के भेदभाव या पक्षपात की आशंका न रहे।
हॉस्टल की सुविधाओं और मेस व्यवस्था पर भी नाराजगी
हॉस्टल आवंटन के अलावा छात्रों ने मेस की बदहाल व्यवस्था और उपलब्ध संसाधनों के सही इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया है। प्रदर्शनकारियों ने आचार्य नरेंद्र देव और लाल बहादुर शास्त्री हॉस्टल में मौजूद संसाधनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने की मांग की है। छात्रों के मुताबिक, हॉस्टल केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में आवंटन प्रक्रिया के साथ-साथ भोजन और बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
फिलहाल छात्रों की प्रमुख मांगें हॉस्टल आवंटन में पारदर्शिता, खाली सीटों के चयन मानकों का खुलासा, नई मेरिट सूची और मेस व्यवस्था में सुधार से जुड़ी हैं। आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर विद्यार्थियों की नजर है। आवंटन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
