उजाला / उत्तरप्रदेश
अलीगढ़: अलीगढ़ नगर निगम में हाउस टैक्स की वसूली में कथित गड़बड़ी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। शिकायतों और जांच के बाद नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने सात आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। इन कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने लोगों से हाउस टैक्स की रकम वसूलने के बावजूद उसे सरकारी खाते में जमा नहीं किया। इसके अलावा, हाउस टैक्स के बिलों में कथित तौर पर छेड़छाड़ कर लाखों रुपये की कर राशि को हजारों रुपये में बदल दिया गया। नगर आयुक्त ने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए हैं।
शिकायत के बाद खुला हाउस टैक्स में गड़बड़ी का मामला
जानकारी के मुताबिक, अलीगढ़ नगर निगम के संपत्ति कर विभाग में पिछले कुछ समय से हाउस टैक्स जमा कराने के नाम पर अनियमितताएं किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। आरोप है कि कुछ कंप्यूटर ऑपरेटर और अन्य आउटसोर्स कर्मचारी लोगों से हाउस टैक्स के पैसे तो ले रहे थे, लेकिन रकम नगर निगम के सरकारी खाते में जमा नहीं हो रही थी। मामले का खुलासा तब हुआ, जब टैक्स जमा करने वाले कुछ लोगों के पास दोबारा हाउस टैक्स के बिल पहुंच गए। लोगों ने जब अपने भुगतान और बिलों में अंतर देखा, तो वे शिकायत लेकर नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा के पास पहुंचे। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नगर आयुक्त ने मामले की जांच के आदेश दिए।
लाखों के टैक्स को हजारों में बदलने का आरोप
जांच के दौरान हाउस टैक्स के बिलों में कथित छेड़छाड़ और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों ने बिलों में हेरफेर कर लाखों रुपये की कर देनदारी को हजारों रुपये तक सीमित कर दिया। इससे नगर निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई। जांच रिपोर्ट में सात कर्मचारियों की भूमिका सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। प्रशासन के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों पर दस्तावेजों की कूटरचना, जालसाजी, सरकारी धन के गबन और मिलीभगत के जरिए नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप हैं।
सात कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त, FIR के निर्देश
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने शुक्रवार को सातों आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी किया। साथ ही, कर अधीक्षक बेचन प्रसाद को निर्देश दिया गया है कि संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ मामले के तथ्यों के अनुरूप सुसंगत कानूनी धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई जाए और इसकी रिपोर्ट नगर निगम प्रशासन को प्रस्तुत की जाए। प्रशासन ने संबंधित कर्मचारियों को भविष्य में नगर निगम अलीगढ़ में तैनात नहीं किए जाने के उद्देश्य से ब्लैकलिस्ट करने का आदेश भी जारी किया है। यह कार्रवाई नगर निगम के राजस्व की सुरक्षा और कर वसूली व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
पहले भी छह कर्मचारियों पर हो चुकी है कार्रवाई
नगर निगम प्रशासन के मुताबिक, मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुपालन में सितंबर में भी नगर निगम को वित्तीय नुकसान पहुंचाने के आरोप में छह आउटसोर्स कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया था। अब एक और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण में पूर्व में बर्खास्त छह कर्मचारियों के साथ इस मामले में सामने आए सात कर्मचारियों की कार्रवाई का जिक्र है। हालांकि, इन दोनों मामलों के कर्मचारियों के बीच संबंध और मामलों की अलग-अलग स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी स्पष्ट नहीं है।
इन सात कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई
नगर निगम प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कार्रवाई की जद में आए कर्मचारियों के नाम इस प्रकार हैं:
- शुभम सक्सेना – कंप्यूटर ऑपरेटर, कर निर्धारण अधिकारी कार्यालय
- अमित कुमार – कंप्यूटर ऑपरेटर, स्वास्थ्य विभाग
- आशीष कुमार – कंप्यूटर ऑपरेटर, गृहकर विभाग
- पंकज कुमार – कॉल टेकर कार्मिक
- प्रशांत कुमार – बिल वितरक
- सुमित सैनी – बिल वितरक
- मनीष कुमार – बिल वितरक
नगर निगम की राजस्व व्यवस्था पर उठे सवाल
हाउस टैक्स नगर निगम की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में कर वसूली के दौरान कथित हेरफेर और भुगतान के बाद भी नागरिकों के नाम पर बकाया बिल जारी होने का मामला राजस्व व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करता है। इस तरह की अनियमितताओं से न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंच सकता है, बल्कि आम नागरिकों को भी आर्थिक और प्रशासनिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम को वित्तीय क्षति पहुंचाने और दस्तावेजों में कथित हेरफेर करने के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। संबंधित कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने, एफआईआर दर्ज कराने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई इसी दिशा में की गई है। अब मामले में दर्ज होने वाली एफआईआर और आगे की कानूनी जांच से आरोपों की विस्तृत स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल, नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई के बाद हाउस टैक्स वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता और भुगतान के रिकॉर्ड की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।
