उजाला / देश
बरेली। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी की गिरफ्तारी के बाद अब बरेली की एक बड़ी रियल एस्टेट परियोजना भी चर्चा में आ गई है। करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित ओमेक्स टाउनशिप में पप्पू गिरधारी की हिस्सेदारी सामने आने के बाद परियोजना के जमीन संबंधी दस्तावेजों और साझेदारी पर सवाल उठने लगे हैं। शनिवार, 7 नवंबर को उत्तराखंड पुलिस की एसआईटी ने पप्पू गिरधारी को उत्तर प्रदेश के झांसी से गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या की शिकायत पर देहरादून के कैंट थाने में 15 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज हुई थी। इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है। गिरफ्तारी के बाद अब उनकी कारोबारी गतिविधियों और संपत्तियों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
800 करोड़ की ओमेक्स टाउनशिप में कितनी है हिस्सेदारी?
बरेली के लालपुर-अधलखिया गांव के पास ओमेक्स की ओर से करीब 71.78 एकड़ क्षेत्रफल में टाउनशिप विकसित करने की योजना है। इसके लिए बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) जमा कराई गई है। डीपीआर के मुताबिक, परियोजना से जुड़े नौ साझेदारों के नाम पर कुल 49.11 एकड़ जमीन दर्ज है। इसमें गिरधारी लाल साहू के नाम पर 0.7477 हेक्टेयर यानी करीब 1.848 एकड़ जमीन शामिल है। यह जमीन परियोजना के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उत्तर प्रदेश टाउनशिप नीति-2023 के तहत डीपीआर के परीक्षण के लिए कुल प्रस्तावित भूमि का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा विकासकर्ता या कंसोर्टियम के स्वामित्व में होना जरूरी है।
नौ साझेदारों के पास है जमीन का स्वामित्व
बीडीए में जमा दस्तावेजों के अनुसार, परियोजना में नौ साझेदारों की जमीन शामिल है। इनमें ओमेक्स प्राइवेट लिमिटेड के पास 11.404 एकड़, श्री अंबे ऑटो डीलर्स के पास 9.351 एकड़, श्री भानखंडी धाम इंफ्रा डेवलपर्स के पास 8.798 एकड़ और वनखंडी रुद्राक्ष धाम इंफ्रा डेवलपर के पास 6.609 एकड़ जमीन दर्ज है। इसके अलावा देवोकेदेव महादेव डेवलपर्स, नेक्स्टेन टाउनशिप, कृष्णा वैष्णवी इंफ्रा डेवलपर्स, गिरधारी लाल साहू और सत्येंद्र राठौर भी जमीन के साझेदारों में शामिल हैं।
क्या पप्पू गिरधारी की गिरफ्तारी से रुक जाएगी परियोजना?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पप्पू गिरधारी की गिरफ्तारी का ओमेक्स टाउनशिप के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा। दरअसल, किसी साझेदार की गिरफ्तारी से पूरी परियोजना अपने आप निरस्त नहीं होती। हालांकि, यदि जांच में उसकी जमीन के स्वामित्व, खरीद-बिक्री या संबंधित दस्तावेजों में कोई कानूनी गड़बड़ी सामने आती है, तो परियोजना की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। बीडीए के स्तर पर सभी साझेदारों के भूमि स्वामित्व और दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्टों के मुताबिक, 15 अक्टूबर को प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में परियोजना का प्रस्ताव पास किया गया था। आगे शासन की अनुमति, लेआउट प्लान और अन्य औपचारिकताओं की प्रक्रिया बाकी है।
अब बीडीए की जांच पर टिकी निगाहें
पप्पू गिरधारी की गिरफ्तारी के बाद ओमेक्स टाउनशिप से जुड़े जमीन के दस्तावेजों की जांच अहम हो गई है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है, जिसमें परियोजना को रोकने या निरस्त करने की बात कही गई हो। ऐसे में आने वाले दिनों में बीडीए की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि इस गिरफ्तारी का 800 करोड़ रुपये की प्रस्तावित टाउनशिप पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल यह मामला बरेली के रियल एस्टेट क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
