INDIA ब्लॉक की रैली के जवाब में BJP का बड़ा प्लान

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उजाला/ राजनीति

नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी इंडिया ब्लॉक के बीच सियासी टकराव तेज होने के आसार हैं। विपक्षी गठबंधन जहां 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ नाम से बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी कर रहा है, वहीं भाजपा भी इसी दिन से देशभर में महीनेभर का पदयात्रा अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान के जरिए भाजपा विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ अपनी राजनीतिक रणनीति को धार देने की तैयारी में है।

एक नवंबर से भाजपा का देशव्यापी अभियान

प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, वरिष्ठ मंत्री और पार्टी के बड़े नेता अलग-अलग स्थानों पर पदयात्राओं में हिस्सा लेंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी जनता के बीच अपनी बात पहुंचाने और विपक्ष के अभियान का राजनीतिक जवाब देने की कोशिश करेगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के भी कुछ कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा है। जानकारी के मुताबिक, अमित शाह 2 नवंबर को हैदराबाद में पदयात्रा में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, 5 नवंबर को हरियाणा में भी उनके पदयात्रा कार्यक्रम में हिस्सा लेने की संभावना है। हालांकि, इन कार्यक्रमों की अंतिम पुष्टि आधिकारिक कार्यक्रम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

इंडिया ब्लॉक की रैली में उठेगा वोटर लिस्ट का मुद्दा

विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित करने का एलान किया है। इस रैली के जरिए विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अपनी आपत्तियां उठाना चाहता है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अनियमितताएं हो रही हैं। साथ ही, विपक्ष के कई नेताओं ने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है। विपक्ष इस रैली के माध्यम से मताधिकार और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवालों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है।

रैली की तारीख पर भी सियासी विवाद

इंडिया ब्लॉक की रैली को लेकर तारीख का मुद्दा भी विवाद का कारण बन गया है। भाजपा ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा है कि 1 नवंबर 1984 में दिल्ली में हुए सिख-विरोधी दंगों की बरसी है। ऐसे में इस दिन रैली आयोजित करने को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी किया था। इसके तहत 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक सुरक्षा और यातायात संबंधी समन्वय की व्यवस्था को मंजूरी दी गई थी।

व्यापारियों ने भी की तारीख बदलने की अपील

रैली को लेकर व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने भी कांग्रेस नेतृत्व से संपर्क किया है। संगठन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर त्योहारों के सीजन को ध्यान में रखते हुए रैली 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। व्यापारियों की चिंता है कि त्योहारों के दौरान राजधानी में बड़े राजनीतिक आयोजन से यातायात और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

भाजपा और विपक्ष के बीच बढ़ेगा सियासी मुकाबला?

एक ओर इंडिया ब्लॉक चुनाव आयोग, SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर भाजपा देशव्यापी पदयात्राओं के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति बना रही है। ऐसे में 1 नवंबर से शुरू होने वाले दोनों राजनीतिक अभियानों पर देशभर की नजर रहेगी। इन कार्यक्रमों का असर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और विपक्ष-भाजपा के बीच टकराव की दिशा पर भी पड़ सकता है।

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