BSP में बड़ा बदलाव ईशान आनंद बने राष्ट्रीय संयोजक

LUCKNOW

उजाला / लखनऊ

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच संगठन में बड़ा बदलाव किया है। बुधवार, 23 सितंबर को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बसपा प्रमुख मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया। यह जिम्मेदारी ऐसे समय दी गई है, जब हाल के दिनों में पार्टी संगठन में कई बड़े बदलाव हुए हैं। बैठक से पहले ईशान आनंद ने मायावती के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। सामने आई तस्वीरों और रिपोर्टों के मुताबिक, मायावती ने भी ईशान की पीठ पर हाथ रखकर उन्हें आशीर्वाद दिया। इसके बाद ईशान बैठक में शामिल हुए। करीब दो घंटे चली बैठक में पार्टी संगठन और आगामी चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा हुई। मायावती ने पदाधिकारियों से जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया।

बैठक में चुनावी तैयारियों के साथ-साथ संगठन की स्थिति और आगे की रणनीति पर भी मंथन किया गया। ईशान आनंद को दी गई जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले उनके बड़े भाई आकाश आनंद पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक रह चुके हैं। सितंबर की शुरुआत में मायावती ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया था और बाद में उन्हें पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया। इसके बाद अब ईशान को राष्ट्रीय स्तर पर अहम जिम्मेदारी दी गई है। बैठक से पहले ईशान की भूमिका को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं। मायावती ने पहले उन्हें संगठन में जिम्मेदारी देने की बात कही थी, हालांकि बाद में उनके रुख में बदलाव आया था। अब 23 सितंबर की बैठक में ईशान को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने से उनकी संगठनात्मक भूमिका एक बार फिर स्पष्ट हो गई है।

वहीं, बैठक में शामिल जौनपुर की मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी विनोद मिश्रा ने दावा किया कि इस बार ब्राह्मण समाज मायावती की सरकार बनाने में सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनाव में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने और सरकार की नाकामियों को जनता के बीच उठाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने मायावती के वर्ष 2007 के शासनकाल का भी उल्लेख किया। बसपा की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पार्टी उत्तर प्रदेश समेत आगामी विधानसभा चुनावों के लिए संगठन को सक्रिय करने में जुटी है। पार्टी की ओर से लगातार संगठनात्मक बैठकों और चुनावी तैयारियों पर जोर दिया जा रहा है। 23 सितंबर की बैठक के बाद ईशान आनंद को मिली नई जिम्मेदारी ने बसपा के संगठन में उनकी भूमिका को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है।

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