आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा चक्रवात, 140 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

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उजाला/देश

बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहा चक्रवाती तूफान ‘अर्णव’ अब तेजी से शक्तिशाली होता जा रहा है। इसके आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ने के साथ ही केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्र में ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई है। तूफान के प्रभाव को देखते हुए आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी समेत कई क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जान-माल के नुकसान को कम करना और जरूरी सेवाओं को सुचारु बनाए रखना है।

140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है हवा की रफ्तार

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के सोमवार, 26 अक्टूबर की सुबह जारी बुलेटिन के अनुसार, चक्रवाती तूफान पूर्व-मध्य और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर केंद्रित था। यह विशाखापत्तनम से लगभग 650 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में स्थित था और करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ रहा था। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, तूफान के और शक्तिशाली होने की आशंका है। इसके गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने और आगे बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप लेने की संभावना जताई गई है। इसके प्रभाव से हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक चलने का अनुमान है। तूफान के आंध्र प्रदेश और यनम के तटवर्ती क्षेत्रों को प्रभावित करने की आशंका के बीच तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

केंद्र सरकार ने तेज की तैयारियां, NDRF की टीमें तैनात

चक्रवात के खतरे को देखते हुए कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) की बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। संबंधित राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें तैनात की गई हैं। अतिरिक्त बचाव दलों को भी जरूरत पड़ने पर तत्काल रवाना होने के लिए तैयार रखा गया है। सेना, नौसेना, वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल को भी राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सतर्क किया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। बिजली, पानी, संचार और अन्य आवश्यक सेवाओं में संभावित व्यवधान को कम करने के साथ ही किसी भी बाधा की स्थिति में सेवाओं को जल्द बहाल करने की व्यवस्था की जाए।

आंध्र प्रदेश और ओडिशा में विशेष सतर्कता

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने, जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित करने और तटीय गांवों में लगातार चेतावनी पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। मछुआरों की नावों को समुद्र से वापस बुलाया जा रहा है। जिन गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी की तारीख नजदीक है, उन्हें पहले से अस्पतालों में पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है। राज्य में NDRF की 10 टीमें तैनात किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा अतिरिक्त टीमें स्टैंडबाय पर रखी गई हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच ऊर्जा विभाग ने 25 हजार बिजली के खंभों और अन्य जरूरी उपकरणों की व्यवस्था की है।

ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगडा, मलकानगिरी, कोरापुट और नबरंगपुर जिलों को संवेदनशील माना गया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तैयारियों की निगरानी के लिए मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रभावित क्षेत्रों में आपदा प्रतिक्रिया बल, दमकल और पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। एहतियात के तौर पर संवेदनशील जिलों में मछली पकड़ने और कुछ पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाई गई है।

बंगाल, झारखंड और बिहार में भी भारी बारिश का अनुमान

चक्रवात का प्रभाव आंध्र प्रदेश और ओडिशा तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। मौसम विभाग ने पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, झारग्राम, बांकुरा और पुरुलिया में 28 से 30 अक्टूबर के बीच भारी बारिश की आशंका जताई है। दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी में भी 29 और 30 अक्टूबर को भारी बारिश हो सकती है। दार्जिलिंग में भूस्खलन की आशंका को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। कोलकाता, हावड़ा और हुगली में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। इसके अलावा तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ और पूर्वी मध्य प्रदेश में भी बारिश को लेकर चेतावनी दी गई है। अंडमान द्वीप समूह में 26 और 27 अक्टूबर को बारिश होने की संभावना है।

मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह

चक्रवात को देखते हुए मछुआरों को 26 से 29 अक्टूबर के बीच समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। पश्चिम बंगाल के तट के पास भी तेज हवाएं चलने का अनुमान है। तमिलनाडु और पुडुचेरी के कई बंदरगाहों पर चक्रवात चेतावनी संकेत लगाए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग और स्थानीय अधिकारियों की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग अनावश्यक रूप से समुद्र के किनारे न जाएं और आपात स्थिति के लिए जरूरी सामान तैयार रखें। चक्रवात की दिशा और तीव्रता में होने वाले बदलावों को देखते हुए आने वाले दिनों में मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।

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