उजाला / देश
महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने आगामी नासिक कुंभ मेले और दिवाली के दौरान कारोबार को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने मांग की है कि कुंभ मेले में केवल हिंदू व्यापारियों को दुकान लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने दिवाली के अवसर पर हिंदू समुदाय के लोगों से हिंदू दुकानदारों से ही खरीदारी करने की अपील की है। राणे का कहना है कि हिंदू धार्मिक आयोजनों में हिंदुओं के कारोबार को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
कुंभ मेले में गैर-हिंदुओं के कारोबार पर उठाए सवाल
नितेश राणे ने नासिक में आयोजित होने वाले आगामी कुंभ मेले का जिक्र करते हुए कहा कि यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख धार्मिक आयोजन है। ऐसे में उनके मुताबिक, मेले में दूसरे धर्मों के लोगों को कारोबार करने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए? उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरे धर्मों के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, तो क्या वहां हिंदुओं को दुकान लगाने की अनुमति दी जाती है? मंत्री ने इसी तर्क के आधार पर कुंभ मेले में केवल हिंदू दुकानदारों को जगह देने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में हिंदू व्यापारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। राणे ने यह भी कहा कि कुंभ मेले में भगवाधारी लोगों की मौजूदगी होनी चाहिए। उनके बयान से स्पष्ट है कि वह इस धार्मिक आयोजन में व्यापारिक गतिविधियों को भी धार्मिक पहचान के आधार पर प्राथमिकता देने के पक्ष में हैं।
दिवाली पर भी हिंदू दुकानदारों से खरीदारी की अपील
कुंभ मेले के साथ-साथ नितेश राणे ने दिवाली को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दिवाली हिंदुओं का त्योहार है और इसे हिंदू समुदाय के लोग मनाते हैं। ऐसे में त्योहार के दौरान हिंदू दुकानदारों से खरीदारी करने में कुछ भी गलत नहीं है। राणे ने लोगों से अपील की कि दिवाली के दौरान खरीदारी करते समय हिंदू व्यापारियों को प्राथमिकता दें। उनके मुताबिक, इससे हिंदू समुदाय के कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने रमजान के दौरान मुंबई के मोहम्मद अली रोड का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि क्या वहां हिंदुओं को दुकान लगाने की अनुमति दी जाती है? उन्होंने कहा कि इस तरह के सवाल आमतौर पर नहीं उठाए जाते, जबकि हिंदू त्योहारों के दौरान व्यापार को लेकर सवाल किए जाते हैं।
धार्मिक आयोजन और व्यापार को लेकर बहस
नितेश राणे के इस बयान ने धार्मिक आयोजनों में व्यापारियों की भागीदारी और खरीदारी के दौरान समुदाय आधारित प्राथमिकता जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। एक ओर मंत्री हिंदू त्योहारों और आयोजनों में हिंदू व्यापारियों को प्राथमिकता देने की वकालत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे विचारों पर समान अवसर, धार्मिक आधार पर भेदभाव और व्यापारिक स्वतंत्रता के नजरिए से भी सवाल उठ सकते हैं। कुंभ मेले जैसे बड़े आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद रहती है। ऐसे आयोजनों में दुकानों के आवंटन और कारोबार से जुड़े नियमों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए किसी भी समुदाय के व्यापारियों की भागीदारी को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित प्रशासन के नियमों और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल, नितेश राणे ने कुंभ मेले में गैर-हिंदुओं को कारोबार की अनुमति नहीं देने की मांग करते हुए दिवाली पर हिंदू दुकानदारों से खरीदारी करने की अपील दोहराई है। अब इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कैसी प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर नजर रहेगी।
