उजाला / उत्तरप्रदेश
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जिला कोर्ट परिसर में अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा देखने को मिला। वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर चलाए जाने से अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी फैल गई। कार्रवाई का विरोध कर रहे वकील सड़क पर बोरी बिछाकर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते विरोध तेज हो गया और कुछ वकील बुलडोजर को रोकने के लिए उसके ऊपर चढ़ गए, जबकि कई अधिवक्ता मशीन के पहियों के सामने लेट गए। इस दौरान महिला वकील भी भावुक हो गईं और कई की आंखों से आंसू छलक पड़े। नगर निगम की इस कार्रवाई ने जिला कोर्ट परिसर में तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया। विरोध कर रहे वकीलों को शांत कराने के लिए पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्हें समझाने का प्रयास किया। हालांकि, चैंबरों को तोड़े जाने से अधिवक्ताओं का गुस्सा कम होने के बजाय और बढ़ता गया।
सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चली कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, नगर निगम की टीम बुलडोजर लेकर जिला कोर्ट परिसर में अवैध निर्माण हटाने पहुंची थी। कार्रवाई सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई और शाम 5 बजे तक जारी रही। इस दौरान करीब 100 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। नगर निगम की योजना कुल 211 चैंबरों को हटाने की थी। इससे पहले भी मई से अगस्त के बीच दो चरणों में 72 अवैध चैंबर तोड़े जा चुके हैं। अब एक बार फिर कार्रवाई शुरू होने से अधिवक्ताओं और नगर निगम के बीच टकराव की स्थिति बन गई। चैंबरों के ध्वस्तीकरण से नाराज वकीलों ने कार्रवाई को रोकने की कोशिश की। कुछ अधिवक्ता बुलडोजर के ऊपर चढ़ गए, तो कुछ उसके पहियों के सामने लेट गए। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को संभालने और प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की।

हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
इस कार्रवाई से पहले वकील नगर निगम के खिलाफ अपील लेकर हाईकोर्ट पहुंचे थे। हालांकि, उनकी अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया और नगर निगम ने परिसर में अभियान चलाया। नगर निगम की ओर से संबंधित वकीलों को पहले ही नोटिस जारी किए गए थे। इन नोटिसों के संबंध में 14 आपत्तियां प्राप्त हुई थीं, जिनका निस्तारण करने का दावा किया गया है। इसके बावजूद कार्रवाई को लेकर अधिवक्ताओं की नाराजगी बनी रही। दरअसल, नगर निगम ने पहले यह कार्रवाई 11 अक्टूबर को प्रस्तावित की थी। लेकिन आपत्तियों के निस्तारण और अदालत में अपील लंबित होने के चलते इसे टाल दिया गया था। अब कानूनी प्रक्रिया के बाद कार्रवाई दोबारा शुरू की गई।
कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद, आगे क्या होगा?
जिला कोर्ट परिसर में चैंबरों को हटाने की कार्रवाई ने नगर निगम और अधिवक्ताओं के बीच विवाद को और गहरा कर दिया है। एक तरफ नगर निगम अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वकील अपने चैंबरों को लेकर विरोध जता रहे हैं। कार्रवाई के दौरान महिला अधिवक्ताओं का भावुक होना और वकीलों का बुलडोजर के सामने लेटना इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को दर्शाता है। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ध्वस्तीकरण को लेकर नाराजगी साफ नजर आई। अब इस मामले में आगे की स्थिति पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि नगर निगम की कार्रवाई के बाद अधिवक्ताओं का विरोध किस दिशा में आगे बढ़ता है और इस विवाद का कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।
