उजाला / उत्तरप्रदेश
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में साधन सहकारी समितियों (PACS) के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में प्रदेशभर से पहुंचे हजारों कर्मचारियों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। कर्मचारियों ने अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन धरने और हड़ताल का ऐलान किया है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि उन्हें कमीशन आधारित व्यवस्था के बजाय सरकारी कोष से नियमित वेतन दिया जाए। इसके साथ ही वर्षों से बकाया वेतन का भुगतान और वेतन निर्धारण की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव किया जाए।
कमीशन आधारित वेतन व्यवस्था से परेशान कर्मचारी
साधन सहकारी समिति परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द कुमार सिंह चौहान के अनुसार, PACS कर्मचारी लंबे समय से वेतन संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारियों को मिलने वाला वेतन कमीशन पर आधारित है। कर्मचारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से उनकी आर्थिक जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि समय-समय पर कमीशन बढ़ाने के बजाय उसमें कटौती की गई, जिससे वेतन भुगतान का संकट और गहरा गया। स्थिति यह है कि कई कर्मचारियों का दो से चार साल तक का वेतन बकाया बताया जा रहा है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी कोष से नियमित वेतन देने की मांग
आंदोलन कर रहे कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि उनके वेतन का निर्धारण उचित और पारदर्शी तरीके से किया जाए। उनका कहना है कि वेतन भुगतान को कमीशन पर निर्भर रखने के बजाय सरकारी कोष से नियमित भुगतान की व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। कर्मचारियों के मुताबिक, जब वे लंबे समय तक काम करने के बावजूद वेतन से वंचित रहते हैं, तो परिवार का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जरूरी जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वे चाहते हैं कि सरकार उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाले, ताकि भविष्य में वेतन भुगतान को लेकर अनिश्चितता न बनी रहे।
सहकारिता मंत्री से मुलाकात के बाद भी नहीं निकला समाधान
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर सहकारिता मंत्री से भी मुलाकात कर चुके हैं। बातचीत के दौरान वेतन समेत कई समस्याओं को उठाया गया था। कर्मचारियों के अनुसार, कुछ मांगों पर सहमति बनने और वेतन भुगतान के लिए व्यवस्था तैयार करने का आश्वासन भी दिया गया था। हालांकि, कर्मचारियों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद अब तक इस संबंध में कोई ठोस आदेश जारी नहीं हुआ है। लगातार ज्ञापन देने, बैठकों और अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। इसी के बाद उन्होंने 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया।
सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी, सरकार पर बढ़ेगा दबाव
PACS कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रह सकता है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करती है, तो प्रदेशभर के कर्मचारी सामूहिक इस्तीफा देने पर भी विचार करेंगे। इस चेतावनी के बाद सहकारिता विभाग और राज्य सरकार के सामने कर्मचारियों की मांगों पर निर्णय लेने की चुनौती बढ़ सकती है। हालांकि, मांगों पर सरकार की ओर से किसी नए आदेश या आधिकारिक निर्णय की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
आगे क्या होगा?
PACS कर्मचारी आंदोलन के जरिए नियमित वेतन, बकाया भुगतान और वेतन निर्धारण व्यवस्था में सुधार की मांग उठा रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार और संबंधित विभाग कर्मचारियों से बातचीत कर कोई समाधान निकालते हैं या नहीं। यदि आंदोलन लंबा खिंचता है, तो साधन सहकारी समितियों के कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका रहेगी। फिलहाल कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर डटे हैं और सरकार से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।
