उजाला / उत्तरप्रदेश
पीलीभीत : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में कुछ मतदाताओं के EPIC नंबर ऑनलाइन सर्च करने पर दूसरे व्यक्ति का विवरण दिखाई देने की शिकायत की प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई है। मामला सामने आने के बाद निर्वाचन अधिकारियों ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों में इस तरह की संभावित गड़बड़ियों की जांच कर दो दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
पीलीभीत में क्या मिली गड़बड़ी?
पूरा मामला पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 से जुड़ा है। समाजवादी पार्टी की ओर से इस संबंध में शिकायत उठाए जाने के बाद कांग्रेस ने भी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े किए। 21 अक्टूबर को कांग्रेस ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दस्तावेजों के आधार पर गड़बड़ी के आरोप लगाए। कांग्रेस का दावा है कि जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर और क्रम संख्या समान रहे, लेकिन उनके नाम बदल गए। इसके अलावा 884 मतदाताओं के नाम हटाने और 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़ने का आरोप लगाया गया, जो संबंधित क्षेत्र में नहीं रहते। विपक्ष ने इन आंकड़ों के आधार पर कुल 16,554 मतदाता प्रविष्टियों में गड़बड़ी का दावा किया है।
हालांकि, इन सभी आंकड़ों और आरोपों को अभी अंतिम रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। प्रारंभिक जांच में कुछ EPIC नंबरों पर दूसरे मतदाताओं का विवरण प्रदर्शित होने की पुष्टि हुई है। अब विस्तृत जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कुल कितने मतदाता प्रभावित हुए और विसंगतियों के पीछे क्या कारण रहे।
अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के निर्देश पर जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी आलोक कुमार ने मामले की जांच कराई। शुरुआती निष्कर्ष सामने आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की है।प्रशासनिक कार्रवाई के तहत अमरिया के एसडीएम हेमंत चौधरी और पूरनपुर के एसडीएम मयंक गोस्वामी को जिला मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। इसके साथ ही संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और वीआरसी ऑपरेटर को मतदाता सूची से जुड़े कार्यों से हटाने तथा उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। निर्वाचन आयोग ने संकेत दिया है कि मामले में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता की लागू धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति की अंतिम कानूनी जिम्मेदारी जांच और निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

सभी 403 विधानसभा सीटों की मतदाता सूची की जांच
पीलीभीत का मामला सामने आने के बाद अब जांच केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने-अपने जिलों की विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में इसी तरह की संभावित विसंगतियों की जांच करने और दो दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। बस्ती सदर, हरैया, महादेवा और रुदौली विधानसभा क्षेत्रों में भी समाजवादी पार्टी की ओर से मतदाता सूची में गड़बड़ियों की शिकायतें उठाई गई हैं। ऐसे में प्रदेशव्यापी जांच के दौरान इन शिकायतों की स्थिति और अन्य क्षेत्रों में सामने आने वाले तथ्यों पर भी नजर रहेगी।
मतदाता सूची की शुद्धता क्यों जरूरी?
EPIC यानी Electors Photo Identity Card नंबर मतदाता पहचान से जुड़ी एक महत्वपूर्ण संख्या है। यदि किसी नंबर को ऑनलाइन खोजने पर दूसरे व्यक्ति का विवरण दिखाई देता है, तो इससे मतदाता रिकॉर्ड की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, केवल ऑनलाइन विवरण में विसंगति सामने आने से यह अपने आप साबित नहीं होता कि किसी व्यक्ति का वोट डालने का अधिकार छिन गया है या चुनाव में वोटों की हेराफेरी हुई है।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती रिकॉर्ड का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना है। जांच में यह पता लगाना होगा कि गड़बड़ी तकनीकी त्रुटि, डेटा अपडेट करने में हुई गलती या किसी अन्य कारण से हुई। साथ ही, जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में गलती मिली है, उनके विवरण को नियमानुसार दुरुस्त करना भी जरूरी होगा। मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद है। इसलिए जांच का उद्देश्य केवल जिम्मेदारी तय करना नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र मतदाता का सही विवरण सुनिश्चित करना और चुनावी व्यवस्था पर जनता का भरोसा बनाए रखना भी होना चाहिए। अब प्रदेशभर से आने वाली रिपोर्टों से स्पष्ट होगा कि पीलीभीत की गड़बड़ी एक सीमित मामला है या मतदाता सूची के प्रबंधन में व्यापक स्तर पर सुधार की जरूरत है।
