उजाला / उत्तरप्रदेश
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने शनिवार को लखनऊ में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के आवास का घेराव किया। इस दौरान अभ्यर्थियों ने घंटी बजाकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की और जमकर नारेबाजी की। पिछले 48 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों को अब भी नियुक्ति संबंधी मांगों पर ठोस निर्णय का इंतजार है। प्रदर्शन के दौरान उस समय अभ्यर्थियों को कुछ उम्मीद जगी, जब जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह खुद आवास के बाहर पहुंचे और आंदोलनकारियों से मुलाकात की। मंत्री ने अभ्यर्थियों की बातें सुनीं और उन्हें इस मामले में साथ देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वह अभ्यर्थियों के साथ हैं और उनकी मांगों पर चर्चा करेंगे। हालांकि, अभी नियुक्ति को लेकर किसी अंतिम निर्णय या समयसीमा की पुष्टि नहीं हुई है।
48 दिनों से जारी है अभ्यर्थियों का आंदोलन
68,500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थी नियुक्ति की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले छह वर्षों से नियुक्ति की उम्मीद में लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिल सका है। अपनी मांगों को लेकर वे मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, सांसद और विधायकों तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं। अभ्यर्थियों के मुताबिक, कई स्तरों पर गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। इसी वजह से उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया और पिछले 48 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार को मंत्री के आवास पर पहुंचकर उन्होंने एक बार फिर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।

क्या हैं अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें?
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांग वर्ष 2018 की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी लाभ सुनिश्चित करने की है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पात्र अभ्यर्थियों को नियमानुसार आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए, ताकि उनके साथ न्याय हो सके। इसके अलावा अभ्यर्थी पांच प्रतिशत छूट के आधार पर चयन सूची में आवश्यक बदलाव करने और संशोधित नई सूची जारी करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि चयन सूची में नियमानुसार संशोधन होने से पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकता है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे पात्र उम्मीदवारों को न्याय मिल सके। हालांकि, आरक्षण के लाभ, पांच प्रतिशत छूट और चयन सूची में बदलाव से जुड़े दावों पर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक आदेशों और भर्ती नियमों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
मंत्री से मुलाकात के बाद जगी समाधान की उम्मीद
शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र देव सिंह का अभ्यर्थियों के बीच पहुंचना आंदोलनकारियों के लिए महत्वपूर्ण रहा। अभ्यर्थियों ने उनके सामने अपनी समस्याएं और लंबे समय से चली आ रही नियुक्ति की मांग रखी। मंत्री ने उनकी बातें सुनीं और मामले पर चर्चा करने का भरोसा दिया। इस आश्वासन के बाद अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि उनकी मांगों को संबंधित स्तर पर उठाया जाएगा और नियुक्ति का रास्ता निकालने की दिशा में पहल हो सकती है। हालांकि, केवल आश्वासन के आधार पर नियुक्ति सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती। अभ्यर्थियों को अब सरकार की ओर से होने वाली अगली कार्रवाई और आधिकारिक निर्णय का इंतजार है।
नियुक्ति के फैसले पर टिकी अभ्यर्थियों की नजर
68,500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़ा यह मामला उन अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मामले का जल्द निस्तारण किया जाए और पात्र उम्मीदवारों को नियमानुसार नियुक्ति का अवसर दिया जाए।
फिलहाल, 48 दिनों से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि मंत्री के आश्वासन के बाद इस मामले में संबंधित विभाग और सरकार की ओर से क्या पहल की जाती है और क्या अभ्यर्थियों की आरक्षण तथा चयन सूची में संशोधन से जुड़ी मांगों पर कोई ठोस निर्णय सामने आता है। मुख्य सवाल यही है कि क्या लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों को जल्द राहत मिलेगी, या उन्हें अपने हक के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा?
