रिलायंस-ब्लिंकइट और जोमैटो हाइपरप्योर के अधिकारियों समेत 10 पर FIR

MAHARASHTRA

उजाला / महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में एक्सपायर हो चुके और खराब खाद्य उत्पादों की कथित बिक्री को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रशासन ने ठाणे और पुणे जिलों में कई स्थानों पर छापेमारी कर कुल 48,09,924 रुपये मूल्य का खाद्य स्टॉक जब्त किया है। इस मामले में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रिलायंस रिटेल, ब्लिंकइट कॉमर्स और जोमैटो हाइपरप्योर से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में ऐसे खाद्य उत्पादों की आपूर्ति और बिक्री से जुड़ी कथित अनियमितताएं सामने आई हैं, जिन्हें एक्सपायर होने, खराब होने या ग्राहकों द्वारा लौटाए जाने के बाद नष्ट किया जाना था। आरोप है कि इन उत्पादों को नष्ट करने के बजाय अलग-अलग माध्यमों से दोबारा बाजार में पहुंचाया जा रहा था। हालांकि, मामले में नामजद लोगों और कंपनियों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।

10 लोगों के खिलाफ FIR, बड़ी कंपनियों के अधिकारी भी नामजद

यह मामला ठाणे के शांति नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। प्राथमिकी में कुल 10 लोगों के नाम शामिल हैं। इनमें रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के होल-टाइम डायरेक्टर वी. सुब्रमण्यम, अशोक कुमार सिंह, रिलायंस रिटेल के नॉमिनी विजय भिकाजी खर्माले और वेयरहाउस मैनेजर नीलेश रामदासराव देशमुख के नाम बताए गए हैं। इसके अलावा ब्लिंकइट कॉमर्स के डायरेक्टर अर्बिंदर सिंह ढींसा, दीपक सिंह और जोमैटो हाइपरप्योर से जुड़े आबिद शेख भी प्राथमिकी में नामजद हैं। अन्य आरोपियों में डिस्पोजल एजेंसी से जुड़े बाबर मियां अहमद सिद्दीकी, सप्लायर गुलजार अब्दुल खान तथा भिवंडी के अन्य कारोबारियों के नाम शामिल हैं।

पुलिस ने मामला खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया है। इन प्रावधानों के तहत खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और जांच में सामने आने वाले अन्य संभावित अपराधों की पड़ताल की जा सकती है।

14 और 15 अक्टूबर को ठाणे-पुणे में छापेमारी

FDA सूत्रों के अनुसार, 14 और 15 अक्टूबर के दौरान ठाणे और पुणे जिलों में कई स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की गई। इसके लिए सात टीमों का गठन किया गया था। इन टीमों में सहायक आयुक्त और खाद्य सुरक्षा अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों ने अलग-अलग गोदामों, डिस्पोजल यार्ड और बिक्री केंद्रों का निरीक्षण कर खाद्य उत्पादों की स्थिति और संबंधित दस्तावेजों की जांच की।

कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए सामान में भिवंडी स्थित एक डिस्पोजल यार्ड से 24 लाख रुपये से अधिक मूल्य के उत्पाद शामिल थे। वाडपे में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के गोदाम से करीब 4.92 लाख रुपये और उसताने में जोमैटो हाइपरप्योर की सुविधा से लगभग 7.81 लाख रुपये मूल्य का सामान जब्त किया गया। सभी स्थानों से जब्त स्टॉक का कुल मूल्य 48.09 लाख रुपये से अधिक बताया गया है।

नष्ट किए जाने वाले उत्पाद बाजार तक कैसे पहुंचे?

FDA की शुरुआती जांच में कथित तौर पर एक ऐसे नेटवर्क का पता चला है, जिसके जरिए एक्सपायर, खराब और ग्राहकों द्वारा लौटाए गए खाद्य उत्पादों को दोबारा बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा था। नियमों के मुताबिक, ऐसे उत्पादों को उनकी स्थिति और लागू खाद्य सुरक्षा प्रावधानों के अनुसार सुरक्षित तरीके से नष्ट या निस्तारित किया जाना चाहिए। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ उत्पाद डिस्पोजल एजेंसियों, बिना लाइसेंस वाले सॉर्टिंग यार्ड और बिचौलियों के माध्यम से दोबारा बाजार में पहुंचाए जा रहे थे। आरोप है कि भिवंडी के एक यार्ड में इन उत्पादों को छांटा जाता था और जो पैकेट बाहर से बिक्री योग्य दिखाई देते थे, उन्हें अलग कर दलालों तथा सप्लायरों को बेच दिया जाता था।

इस मामले में डिस्पोजल प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं। अधिकारियों को कथित तौर पर ऐसे प्रमाणपत्र और रिकॉर्ड मिले, जिनमें उत्पादों को नष्ट किए जाने का उल्लेख था। हालांकि, आशंका जताई गई कि वास्तविक निस्तारण की पुष्टि किए बिना कुछ दस्तावेज जारी किए गए थे।

डिस्पोजल रिकॉर्ड में मिलीं गड़बड़ियां

FDA अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान डिस्पोजल रिकॉर्ड में सामान की मात्रा को लेकर अंतर और भेजने वाले तथा प्राप्त करने वाले पक्षों के विवरण में विसंगतियां भी सामने आईं। इन गड़बड़ियों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उत्पाद किस स्थान से निकले, किन लोगों के माध्यम से आगे पहुंचे और उनकी बिक्री में किनकी भूमिका रही। सूत्रों के मुताबिक, भिवंडी के गुलजार नगर स्थित एक रिटेल आउटलेट पर एक्सपायर और लीक हो रहे खाद्य उत्पाद बिक्री के लिए रखे मिले। बताया गया कि यह आउटलेट आवश्यक लाइसेंस और खरीद बिलों के बिना संचालित हो रहा था। FDA ने निरीक्षण के दौरान उत्पादों की सूची तैयार की, नमूने लिए, संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए और जब्त सामान को लेकर निर्देश जारी किए।

पांच प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित, चार जगह कामकाज बंद

इस मामले में कार्रवाई केवल खाद्य स्टॉक की जब्ती और FIR तक सीमित नहीं रही। 15 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद पांच प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए, जबकि बिना लाइसेंस संचालित चार स्थानों पर कामकाज रोकने के आदेश दिए गए। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि जब्त किए गए उत्पादों को जांच और आगे के आदेशों के बिना दूसरी जगह नहीं ले जाया जाए, न बेचा जाए और न ही नष्ट किया जाए। इससे जांच के दौरान जब्त स्टॉक और संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

ग्राहकों की सुरक्षा और खाद्य निगरानी पर उठे सवाल

यह मामला खाद्य उत्पादों की सप्लाई चेन, वेयरहाउस प्रबंधन और एक्सपायर सामान के निस्तारण की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उपभोक्ताओं के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि उनके घर पहुंचने वाले खाद्य उत्पाद सुरक्षित हैं और निर्धारित मानकों का पालन करते हैं। हालांकि, किसी कंपनी या व्यक्ति का FIR में नाम होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। जांच एजेंसियां अब कथित सप्लाई नेटवर्क, दस्तावेजों, जब्त उत्पादों और संबंधित प्रतिष्ठानों की भूमिका की पड़ताल करेंगी। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा।

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