बिहार के 134 सरकारी स्कूलों की जमीन पर अतिक्रमण, कहीं दुकान तो कहीं खेती

SAMASTIPUR

उजाला / बिहार

समस्तीपुर: बिहार में बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन समस्तीपुर जिले से सामने आए सरकारी आंकड़े स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और जमीन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिले के सभी 20 प्रखंडों के 134 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों की कुल 7,844.62 डिसमिल जमीन अतिक्रमण की चपेट में बताई गई है। कहीं स्कूल की जमीन पर दुकान संचालित हो रही है, तो कहीं झोपड़ी बनाकर कब्जा किए जाने और खेती किए जाने की जानकारी सामने आई है।

134 विद्यालयों की जमीन पर कब्जे का मामला

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, समस्तीपुर जिले में सरकारी विद्यालयों की बड़ी जमीन पर अतिक्रमण दर्ज किया गया है। यह मामला केवल कुछ स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में सरकारी शैक्षणिक परिसरों की जमीन प्रभावित बताई गई है। स्कूलों की जमीन का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई, खेलकूद, प्रार्थना सभा और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जाना चाहिए। ऐसे में यदि इन परिसरों की जमीन पर लंबे समय से अतिक्रमण बना हुआ है, तो स्कूलों के विकास और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ने की आशंका है।

समस्तीपुर प्रखंड में सबसे ज्यादा अतिक्रमण

जारी विभागीय सूची के अनुसार, समस्तीपुर प्रखंड में 40 विद्यालयों की 2,946.5 डिसमिल जमीन अतिक्रमण की सूची में शामिल है। इसके बाद मोरवा के एक विद्यालय की 1,124.8 डिसमिल जमीन पर कब्जा बताया गया है। वहीं, पूसा प्रखंड के 10 विद्यालयों की 758.25 डिसमिल जमीन अतिक्रमण से प्रभावित है। इसके अलावा उजियारपुर के 19 विद्यालयों की 564.3 डिसमिल, रोसड़ा के दो विद्यालयों की 468.75 डिसमिल और हसनपुर के तीन विद्यालयों की 350 डिसमिल जमीन अतिक्रमण की सूची में दर्ज है। ये आंकड़े बताते हैं कि सरकारी विद्यालयों की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराना प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती है।

कहीं प्रिंटिंग प्रेस, कहीं झोपड़ी तो कहीं हो रही खेती

समस्तीपुर शहर के काशीपुर स्थित तिरहुत एकेडमी की दो डिसमिल जमीन पर करीब 20 वर्षों से कब्जा होने की जानकारी दी गई है। यहां प्रिंटिंग प्रेस की दुकान संचालित होने की बात सामने आई है। इसी तरह मॉडल उच्च विद्यालय की 30 डिसमिल जमीन पर 19 वर्षों से अतिक्रमण दर्ज है। मध्य विद्यालय बेला पचरुखी की 100 डिसमिल जमीन पर खेती किए जाने की जानकारी विभागीय सूची में दी गई है। वहीं, उच्च माध्यमिक विद्यालय बेझाडीह की तीन डिसमिल जमीन पर ग्रामीणों द्वारा करीब 10 वर्षों से झोपड़ी बनाए जाने का उल्लेख है। इसके अतिरिक्त उत्क्रमित मध्य विद्यालय भुसारी, मध्य विद्यालय विशनपुर और प्राथमिक विद्यालय भूईधारा समेत अन्य विद्यालयों की जमीन पर भी झोपड़ियां बने होने की जानकारी सामने आई है। इन मामलों में अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति और जमीन की सीमाओं की पुष्टि संबंधित अभिलेखों और प्रशासनिक जांच के आधार पर की जानी है।

बड़े रकबे वाली जमीन भी अतिक्रमण की सूची में

विभागीय आंकड़ों में कुछ विद्यालयों की जमीन पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण दर्ज होने की बात कही गई है। उच्च विद्यालय धर्मपुर की 730 डिसमिल, मध्य विद्यालय धुरलख की 560 डिसमिल और उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय धुरलख की 437 डिसमिल जमीन सूची में शामिल है। इसके अलावा उच्च विद्यालय हरपुर सिंघिया जगतसिंहपुर की 365 डिसमिल जमीन पर भी कब्जा दर्ज किया गया है। इन मामलों में जमीन का सीमांकन, पुराने राजस्व अभिलेखों का सत्यापन और अतिक्रमण की वास्तविक सीमा निर्धारित करना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि संबंधित जमीन का कितना हिस्सा विद्यालय के उपयोग से बाहर है और उसे वापस लेने के लिए किन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

शिक्षा विभाग ने सीओ को दिए कार्रवाई के निर्देश

मामले को लेकर बिहार शिक्षा परियोजना ने संबंधित अंचल अधिकारियों (सीओ) को पत्र भेजकर विद्यालयों की जमीन का सीमांकन कराने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान, शुभम कसौधन ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को भी संबंधित अंचल अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखने को कहा है।निर्देश के अनुसार, जमीन से जुड़े अभिलेखों के आधार पर सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग किया जाना है। हालांकि, अब तक कितने विद्यालयों की जमीन का सीमांकन पूरा हुआ है और कितने मामलों में वास्तविक रूप से कब्जा हटाया गया है, इसकी जानकारी सामने आना बाकी है।

बच्चों के भविष्य से जुड़ा है मामला

सरकारी स्कूलों की जमीन पर लंबे समय तक अतिक्रमण बने रहने के मामलों ने प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। यदि जमीन पर वर्षों से कब्जा है, तो यह भी जांच का विषय है कि समय रहते इसकी पहचान और कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। फिलहाल शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी इस मामले में तेजी से कदम उठाएंगे। लेकिन असली परीक्षा तब होगी, जब विद्यालयों की जमीन का सीमांकन पूरा होगा और नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जमीन पर दिखाई देगी। समस्तीपुर के 134 विद्यालयों की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में अब प्रशासन की भूमिका अहम है। सवाल यही है कि क्या बच्चों के स्कूलों को उनकी पूरी जमीन वापस मिल पाएगी, या यह मामला भी सरकारी निर्देशों और कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा?

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