कानपुर में पुरानी मजार की दीवार ढही, मलबे में मिला शिवलिंग

KANPUR

उजाला / उत्तरप्रदेश

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में गुरुवार सुबह एक पुरानी धार्मिक इमारत की दीवार अचानक ढहने के बाद इलाके में चर्चा का माहौल बन गया। घटना सजेती थाना क्षेत्र के दहिलर गांव की बताई जा रही है। सुबह करीब 8 बजे पुरानी दीवार गिरने के बाद जब मलबा हटाया गया तो उसमें पत्थर का शिवलिंग और माता गौरा जैसी प्रतिमा के कुछ अवशेष दिखाई दिए। अवशेष मिलने की जानकारी गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने मलबे से मिले पत्थरों को सावधानी से बाहर निकाला और उन्हें अलग स्थान पर रख दिया। इसके बाद कुछ लोगों ने अवशेषों पर पुष्प चढ़ाकर पूजा-अर्चना शुरू कर दी। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। लोग मिले हुए पत्थरों और पुराने धार्मिक स्थल के इतिहास को लेकर आपस में चर्चा करते नजर आए।

ग्रामीण इसे पंच बीर बाबा की मजार बताते हैं

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, जिस जगह की दीवार गिरी है, उसे लंबे समय से पंच बीर बाबा की मजार के नाम से जाना जाता था। ग्रामीणों का दावा है कि यह स्थल काफी पुराना है और इसका निर्माण मुगल शासनकाल से जुड़ा हुआ माना जाता है। कुछ ग्रामीण इसे करीब एक हजार वर्ष पुराना स्थल भी बता रहे हैं। हालांकि, इन दावों की अभी किसी आधिकारिक या पुरातात्विक जांच से पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, यह मजार करीब दो बिस्वा जमीन में बनी थी और चारों ओर से इसकी दीवार थी। दीवार की मोटाई लगभग डेढ़ मीटर बताई जा रही है। निर्माण में राविश, चूना और ककई ईंटों का इस्तेमाल होने की बात कही गई है। मजार के भीतर एक पुराना चबूतरा भी मौजूद था। बताया जाता है कि करीब 25 वर्ष पहले तक यहां मुस्लिम समुदाय के लोग बैठक किया करते थे। बाद में नियमित देखरेख नहीं होने के कारण इमारत धीरे-धीरे जर्जर होती चली गई। समय के साथ इसकी तीन तरफ की दीवारें पहले ही ढह चुकी थीं। गुरुवार सुबह बची हुई दीवार भी अचानक भरभराकर गिर गई।

मलबा हटाने पर मिले धार्मिक अवशेष

दीवार गिरने के बाद जब ग्रामीण मलबा हटाने लगे तो नीचे पत्थर का शिवलिंग और माता गौरा जैसी आकृति वाले कुछ पत्थर दिखाई दिए। इन्हें देखकर ग्रामीणों में कौतूहल बढ़ गया। लोगों ने अवशेषों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर रखा और वहां पूजा शुरू कर दी। घटना की जानकारी आसपास के गांवों तक पहुंचने के बाद मौके पर लोगों की संख्या बढ़ती गई। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मिले हुए पत्थर वास्तव में कितने पुराने हैं और उनका ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व क्या है।

जांच के बाद साफ होगी वास्तविक स्थिति

कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र में कई पुराने धार्मिक स्थलों का उल्लेख मिलता है और क्षेत्र में प्राचीन मंदिरों से जुड़ी स्थानीय मान्यताएं भी रही हैं। उदाहरण के तौर पर सजेती क्षेत्र के अज्योरी में स्थित बिहारेश्वर महादेव मंदिर को भी स्थानीय इतिहास और मान्यताओं से जोड़ा जाता रहा है, हालांकि उसके शिवलिंग की निश्चित प्राचीनता को लेकर भी प्रमाणों की कमी का उल्लेख किया गया है। ऐसे में दहिलर गांव में मिले शिवलिंग और अन्य पत्थरों की वास्तविक उम्र को लेकर भी अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। इसके लिए पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच, स्थल का निरीक्षण और उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों का अध्ययन जरूरी होगा। फिलहाल घटना के बाद गांव में चर्चा तेज है और लोग पुराने स्थल तथा मलबे से मिले अवशेषों को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। मजार की वास्तविक उम्र, स्थल का इतिहास और मिले पत्थरों की प्राचीनता की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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