लखनऊ में गोमती का कहर – पलासियो से IIIT तक पानी

LUCKNOW

उजाला / उत्तरप्रदेश

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ के हालात गंभीर होते जा रहे हैं। शहर के कई ऐसे इलाके भी अब पानी की चपेट में आ गए हैं, जहां कुछ दिन पहले तक सामान्य स्थिति थी। पलासियो मॉल, इकाना स्टेडियम, IIIT लखनऊ और बैकुंठ धाम तक बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। वहीं फैजुल्लागंज में हजारों परिवारों के सामने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की मजबूरी पैदा हो गई है। गोमती का पानी शहीद पथ की सर्विस लेन तक पहुंच चुका है। फीनिक्स पलासियो मॉल के सामने सड़क पर पानी भरने के बाद आवागमन को बैरिकेड लगाकर नियंत्रित किया गया है। कई जगह सड़कें टापू जैसी नजर आ रही हैं और लोगों को घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। इकाना स्टेडियम और उसके आसपास भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक बुधवार को पलासियो और इकाना के सामने करीब डेढ़ से दो फीट तक पानी जमा हो गया था।

बाढ़ का असर IIIT लखनऊ तक पहुंच गया है। परिसर में पानी भरने के कारण संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियां बंद कर दी गई हैं और परीक्षाएं अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई हैं। सुरक्षा के मद्देनजर बिजली आपूर्ति भी बंद की गई। करीब 800 हॉस्टल छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया, जबकि लगभग 300 छात्र अपने घर लौट गए। सबसे गंभीर तस्वीर फैजुल्लागंज से सामने आ रही है। यहां करीब 40 हजार घर बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में पानी 5 से 6 फीट तक पहुंचने की बात सामने आई है। बड़ी संख्या में परिवार अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। पानी भरने से घरों में रखा राशन, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य घरेलू सामग्री खराब होने का खतरा बढ़ गया है। कई परिवार नावों और अन्य साधनों के सहारे जरूरी सामान लेकर बाहर निकल रहे हैं।

फैजुल्लागंज में राहत और भोजन-पानी की व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जरूरत के मुताबिक समय पर खाना और पीने का पानी नहीं पहुंच रहा। राहत कार्य के दौरान NDRF की टीम और स्थानीय लोगों के बीच नोकझोंक की स्थिति भी बनी। गोमती की बाढ़ का असर शहर के घाटों और अंतिम संस्कार स्थलों पर भी पड़ा है। गुलाला घाट का रास्ता और आसपास का इलाका जलमग्न होने से अंतिम संस्कार प्रभावित हुए हैं। बैकुंठ धाम के निचले हिस्सों में भी पानी पहुंचने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारों के मुताबिक लखनऊ में आई इस बाढ़ की वजह सिर्फ स्थानीय बारिश नहीं है। गोमती के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई भारी बारिश का पानी धीरे-धीरे नीचे की ओर आया और करीब 8 से 10 दिन बाद लखनऊ में इसका असर दिखाई दिया। यही वजह है कि बारिश रुकने के बाद भी नदी का जलस्तर बढ़ता रहा। हालांकि, 8 अक्टूबर को ऊपरी इलाकों के कुछ गेज स्टेशनों पर जलस्तर में गिरावट के संकेत मिलने के बाद गोमती के जल्द घटने की उम्मीद भी जताई गई है। इसके बावजूद निचले इलाकों में जमा पानी को निकलने और सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है।

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