उजाला / उत्तरप्रदेश
कानपुर की बिठूर नगर पंचायत अध्यक्ष पद के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। भाजपा प्रत्याशी राणा समरेंद्र सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय उम्मीदवार आदर्श द्विवेदी उर्फ विभु को 2,483 मतों के अंतर से हराकर अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। समरेंद्र सिंह को कुल 4,210 वोट मिले, जबकि आदर्श द्विवेदी को 1,727 मत प्राप्त हुए। कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप द्विवेदी को बेहद कम मतों से संतोष करना पड़ा। यह चुनाव केवल नगर पंचायत की एक सीट तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे स्थानीय राजनीतिक प्रभाव और पूर्व अध्यक्ष डॉ. निर्मला सिंह की विरासत से जोड़कर भी देखा जा रहा था। जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया गया और विजयी प्रत्याशी को बधाइयां दी गईं।
राणा समरेंद्र सिंह को मिले 4,210 वोट, जानिए किसे कितने मत
बिठूर नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए 13 अक्टूबर को मतदान कराया गया था। इसके बाद गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुबह आठ बजे नगर पंचायत भवन में मतगणना शुरू हुई। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 10 वार्डों के मतपत्रों की गिनती की गई। परिणाम सामने आने के बाद भाजपा प्रत्याशी की जीत स्पष्ट हो गई। उपलब्ध चुनाव परिणामों के अनुसार प्रमुख प्रत्याशियों को मिले मत इस प्रकार रहे:
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राणा समरेंद्र सिंह (भाजपा): 4,210 वोट
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आदर्श द्विवेदी उर्फ विभु (निर्दलीय): 1,727 वोट
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प्रदीप द्विवेदी (कांग्रेस): स्थानीय रिपोर्टों में उनके मतों की संख्या अलग-अलग बताई गई है; अंतिम आधिकारिक आंकड़े से इसकी पुष्टि की जानी चाहिए।
भाजपा प्रत्याशी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 2,483 वोटों से हराया। मतगणना के शुरुआती चरण से ही समरेंद्र सिंह ने बढ़त बना ली थी। प्रत्येक चरण की गिनती के साथ उनकी बढ़त मजबूत होती गई और अंत में उन्होंने निर्णायक जीत हासिल की।

मां की राजनीतिक विरासत संभालेंगे राणा समरेंद्र सिंह
इस उपचुनाव का सबसे अहम पहलू पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष डॉ. निर्मला सिंह की राजनीतिक विरासत है। जून 2026 में उनके निधन के बाद अध्यक्ष पद रिक्त हो गया था, जिसके चलते उपचुनाव कराना पड़ा। डॉ. निर्मला सिंह बिठूर की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहीं और पांच बार नगर पंचायत अध्यक्ष चुनी गई थीं। उन्होंने वर्ष 2000 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी। इसके बाद 2006 और 2012 में भी अध्यक्ष बनीं, जबकि 2017 और 2023 में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी।
राणा समरेंद्र सिंह डॉ. निर्मला सिंह के बड़े बेटे हैं। वहीं, उनके छोटे बेटे अभिजीत सिंह सांगा बिठूर से भाजपा विधायक हैं। ऐसे में इस उपचुनाव को परिवार की राजनीतिक पकड़ और स्थानीय जनाधार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था।जीत के बाद समरेंद्र सिंह ने इसे जनता का आशीर्वाद बताया और अपनी दिवंगत मां डॉ. निर्मला सिंह को समर्पित किया। उन्होंने बिठूर के लोगों के विश्वास पर खरा उतरने का भरोसा जताया। समर्थकों ने भी कहा कि यह जीत डॉ. निर्मला सिंह को समर्पित है और उनके परिवार की ओर से क्षेत्र में किए गए कार्यों की स्वीकार्यता को दर्शाती है।
65 प्रतिशत से अधिक मतदान, मुकाबले पर थी नजर
बिठूर नगर पंचायत अध्यक्ष पद के उपचुनाव में कुल 9,474 मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें से 6,193 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस तरह मतदान प्रतिशत लगभग 65.4 रहा। भाजपा ने राणा समरेंद्र सिंह को पार्टी के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतारा था। कांग्रेस ने प्रदीप द्विवेदी को प्रत्याशी बनाया, जबकि समाजवादी पार्टी से जुड़े आदर्श द्विवेदी उर्फ विभु निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े। चुनाव के दौरान भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थकों के बीच कहासुनी की खबरें भी सामने आई थीं। इसके बावजूद मतदान और मतगणना के लिए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। नतीजों में भाजपा प्रत्याशी की स्पष्ट बढ़त ने मुकाबले को एकतरफा बना दिया।
अब विकास कार्यों पर रहेंगी निगाहें
राणा समरेंद्र सिंह की जीत के बाद बिठूर के लोगों की निगाहें अब नगर पंचायत के विकास कार्यों पर रहेंगी। स्थानीय स्तर पर साफ-सफाई, सड़क, जल निकासी, पेयजल और अन्य नागरिक सुविधाएं नगर पंचायत की प्रमुख जिम्मेदारियों में आती हैं। ऐसे में जनता को उम्मीद होगी कि नए अध्यक्ष क्षेत्र की जरूरतों को प्राथमिकता देंगे और लंबित समस्याओं के समाधान के लिए काम करेंगे। कुल मिलाकर, बिठूर उपचुनाव में भाजपा की यह जीत स्थानीय राजनीति में पार्टी की स्थिति के लिहाज से अहम है। अब देखना होगा कि राणा समरेंद्र सिंह जनता के मिले समर्थन को विकास कार्यों में किस तरह बदलते हैं।
