उजाला / उतरप्रदेश
लखनऊ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में शुक्रवार को गरिमापूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति, रजिस्ट्री के अधिकारियों और कर्मचारियों ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों और आदर्शों को याद किया। कार्यक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति एवं लखनऊ पीठ में कार्यरत न्यायमूर्ति राजन रॉय ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। आधिकारिक न्यायालय रिकॉर्ड के अनुसार न्यायमूर्ति राजन रॉय लखनऊ पीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश हैं और प्रशासनिक समिति के सदस्य भी हैं।
गांधी के विचारों को किया याद
माल्यार्पण के बाद उच्च न्यायालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रभक्ति और गांधीवादी विचारों से जुड़े गीतों का भी आयोजन किया गया। सबसे पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ और इसके बाद राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति राजन रॉय ने महात्मा गांधी के जीवन, उनके दर्शन और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को याद किया। उन्होंने गांधीवादी विचारों की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि गांधीजी का जीवन समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके अनुसार गांधीजी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपना जीवन देश के लिए समर्पित किया।
न्याय और समाज के संदर्भ में गांधीवादी दर्शन
गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांधीजी के उन मूल्यों को याद करने का अवसर भी बना, जिनमें सत्य, अहिंसा, नैतिकता, समानता और जनसेवा को विशेष महत्व दिया गया है। न्यायपालिका जैसे संवैधानिक संस्थान में गांधीजी के विचारों को याद किए जाने का अपना विशेष महत्व है। सत्य और अहिंसा के उनके सिद्धांत सार्वजनिक जीवन में नैतिक आचरण और शांतिपूर्ण तरीके से समस्याओं के समाधान की प्रेरणा देते हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर न्यायमूर्ति राजन रॉय को लखनऊ में वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। न्यायालय के रिकॉर्ड के मुताबिक उन्होंने 2014 में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और 2016 में स्थायी न्यायाधीश बने।
राम धुन के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में राम धुन का सामूहिक गायन किया गया। इसके साथ ही गांधी जयंती समारोह का समापन हुआ। कार्यक्रम में न्यायालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की सहभागिता रही। गौरतलब है कि हर वर्ष 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के रूप में गांधी जयंती मनाई जाती है। यह दिन देश में गांधीजी के जीवन और उनके विचारों को स्मरण करने के साथ-साथ सत्य, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों पर विचार करने का अवसर भी प्रदान करता है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में आयोजित समारोह में भी इन्हीं मूल्यों को केंद्र में रखते हुए महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी गई। न्यायमूर्ति राजन रॉय द्वारा प्रतिमा पर माल्यार्पण, अधिकारियों-कर्मचारियों की पुष्पांजलि, वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के गायन तथा राम धुन के साथ कार्यक्रम गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
