उजाला / प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड कर्मचारियों से जुड़ी पुरानी पेंशन योजना यानी Old Pension Scheme (OPS) को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने बांदा जिले के तीन सेवानिवृत्त संग्रह अमीनों को पुरानी पेंशन का लाभ देने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि पेंशन के लिए पात्र सेवा अवधि तय करते समय नियमित नियुक्ति से पहले की गई मौसमी सेवा को भी निर्धारित परिस्थितियों में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, कोर्ट ने पेंशन की राशि को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। अदालत के मुताबिक, पात्रता के लिए सेवा अवधि की गणना में पहले की मौसमी सेवा को शामिल किया जा सकता है, लेकिन पेंशन की वास्तविक राशि की गणना नियमित सेवा अवधि के आधार पर ही की जाएगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनिश कुमार गुप्ता की पीठ ने राम सनेही और दो अन्य रिटायर्ड कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
मौसमी संग्रह अमीन के पद पर हुई थी नियुक्ति
मामले में शामिल तीनों याचिकाकर्ताओं की शुरुआती नियुक्ति बांदा जिले की अलग-अलग तहसीलों में मौसमी संग्रह अमीन के तौर पर हुई थी।
रिकॉर्ड के मुताबिक, पहले याचिकाकर्ता की नियुक्ति तहसील सदर में 1 सितंबर 1989 को हुई थी। वहीं, दूसरे और तीसरे याचिकाकर्ता की नियुक्ति क्रमशः 17 दिसंबर 1990 को बाबेरू और अतर्रा तहसील में की गई थी।
तीनों कर्मचारियों ने कई वर्षों तक मौसमी संग्रह अमीन के तौर पर काम किया। इसके बाद उनकी सेवाओं को नियमित किया गया। पहले कर्मचारी की सेवा वर्ष 2005 में नियमित हुई, जबकि दूसरे और तीसरे कर्मचारियों की सेवाएं वर्ष 2009 में नियमित की गईं।
तीनों कर्मचारी अलग-अलग वर्षों में सेवानिवृत्त हुए। पहले कर्मचारी ने 2019, दूसरे ने 2021 और तीसरे ने 2022 में रिटायरमेंट लिया।
विभाग ने पुरानी पेंशन का दावा किया था खारिज
रिटायरमेंट के बाद तीनों कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने की मांग की थी। हालांकि, विभाग ने 12 अप्रैल 2023 के आदेश के जरिए उनके दावे को खारिज कर दिया।
विभाग की ओर से कहा गया था कि कर्मचारियों ने पेंशन के लिए निर्धारित न्यूनतम पात्र सेवा अवधि पूरी नहीं की है। इसके बाद कर्मचारियों ने विभाग के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सैयद वाजिद अली ने अदालत के सामने पुराने न्यायिक फैसलों का हवाला दिया। इनमें प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और उदय प्रताप ठाकुर बनाम बिहार राज्य से जुड़े फैसले शामिल थे।
दलील दी गई कि कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति से पहले की गई सेवा को भी पेंशन की पात्रता तय करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।
कोर्ट ने सेवा अवधि को लेकर क्या कहा?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने पहले के अलख प्रकाश मिश्रा मामले में दिए गए फैसले का भी संदर्भ लिया। अदालत ने कहा कि कुछ परिस्थितियों में अस्थायी, एडहॉक, वर्क-चार्ज, मौसमी या अन्य अस्थायी सेवाओं को पेंशन के लिए आवश्यक पात्र सेवा अवधि निर्धारित करने में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, कोर्ट ने पेंशन की गणना को इससे अलग रखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि पेंशन की वास्तविक राशि का निर्धारण नियमित सेवा की अवधि के आधार पर किया जाएगा।
इस अंतर का मतलब यह है कि कर्मचारी की शुरुआती मौसमी सेवा पेंशन पाने की न्यूनतम पात्रता पूरी करने में मदद कर सकती है, लेकिन उससे पेंशन की राशि स्वतः नहीं बढ़ेगी।
दो कर्मचारियों की नियमित सेवा 10 साल से ज्यादा
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि दूसरे और तीसरे याचिकाकर्ताओं ने नियमितीकरण के बाद 10 वर्ष से अधिक की नियमित सेवा पूरी की थी। इसलिए वे पेंशन के लिए निर्धारित सेवा अवधि की शर्त पूरी करते थे।
वहीं, पहले याचिकाकर्ता की नियमित सेवा निर्धारित अवधि से कुछ महीने कम थी। लेकिन जब नियमित नियुक्ति से पहले की उनकी मौसमी संग्रह अमीन की सेवा को भी पात्रता तय करने के लिए शामिल किया गया, तो वे भी पेंशन लाभ के पात्र पाए गए।
इस आधार पर हाईकोर्ट ने तीनों रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का रास्ता साफ कर दिया।
8 सप्ताह के भीतर करना होगा भुगतान
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि तीनों याचिकाकर्ताओं के रिटायरमेंट से जुड़े बकाये की गणना कर उसका भुगतान किया जाए।
अदालत के आदेश के मुताबिक, प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से आठ सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करनी होगी।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट रखा है कि पेंशन की राशि की गणना संबंधित कर्मचारी की नियमित सेवा अवधि के आधार पर ही होगी।
यह फैसला उत्तर प्रदेश में मौसमी या अस्थायी सेवा के बाद नियमित हुए कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ बन सकता है, हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति, नियमितीकरण और लागू पेंशन नियमों पर निर्भर करेगा।
