उजाला/ उत्तरप्रदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अनुदानित मदरसों में शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं की आधार आधारित बायोमीट्रिक उपस्थिति व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। व्यवस्था लागू करने के निर्देश जारी होने के करीब तीन महीने बाद भी राज्य के 558 अनुदानित मदरसों में से करीब 200 में बायोमीट्रिक हाजिरी शुरू नहीं हो पाई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मदरसा शिक्षा परिषद ने संबंधित मदरसों के प्रबंधकों से जवाब तलब किया है। अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग के मंत्री ओम प्रकाश राजभर और राज्य मंत्री दानिश आजाद की मौजूदगी में 23 मई को हुई समीक्षा बैठक में अनुदान पर संचालित मदरसों में आधार आधारित बायोमीट्रिक उपस्थिति व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद मदरसा शिक्षा परिषद की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने 11 जून को सभी अनुदानित मदरसों के प्रबंधकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे।

जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया था कि जिन मदरसों में बायोमीट्रिक प्रणाली अभी तक शुरू नहीं हुई है या जहां यह व्यवस्था आंशिक रूप से संचालित हो रही है, वहां आवश्यक उपकरण स्थापित कर प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्था शुरू कराई जाए। इसके साथ ही छात्र-छात्राओं की मदरसे में उपस्थिति को भी बायोमीट्रिक प्रणाली से दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। निर्देशों के मुताबिक विद्यार्थियों के मदरसे में आने और जाने, दोनों समय की उपस्थिति दर्ज की जानी है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति का रिकॉर्ड तैयार करना और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना है। शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति भी आधार आधारित बायोमीट्रिक प्रणाली के जरिए दर्ज कराने की व्यवस्था की गई है। व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू कराने के लिए जिला स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी भी तय की गई थी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि बायोमीट्रिक व्यवस्था लागू करने में आने वाली प्रशासनिक या तकनीकी बाधाओं का समयबद्ध तरीके से समाधान कराया जाए। इसके लिए जिला स्तर के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इसके बावजूद करीब 200 अनुदानित मदरसों में अभी तक बायोमीट्रिक उपस्थिति व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है। अब मदरसा शिक्षा परिषद ने इन संस्थानों के प्रबंधकों से व्यवस्था लागू नहीं होने का कारण स्पष्ट करने को कहा है। परिषद की ओर से यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि निर्धारित व्यवस्था को लागू कराने में लापरवाही पर संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। विभाग ने अक्टूबर तक प्रदेश के सभी अनुदानित मदरसों में शत-प्रतिशत बायोमीट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित कराने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत जिन संस्थानों में अभी व्यवस्था शुरू नहीं हुई है, वहां उपकरणों की उपलब्धता और तकनीकी प्रक्रिया पूरी कराने पर जोर दिया जा रहा है।

राज्य मंत्री दानिश आजाद ने कहा कि सरकार अल्पसंख्यक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक बायोमीट्रिक उपस्थिति व्यवस्था इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जिन अनुदानित मदरसों में अभी तक बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं की जा रही है, वहां के प्रबंधकों को नोटिस जारी कराए जा रहे हैं। अब अक्टूबर की समयसीमा तक सभी 558 अनुदानित मदरसों में व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है, इस पर विभाग और मदरसा शिक्षा परिषद की निगरानी रहेगी।
