उजाला / उत्तरप्रदेश
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा नगर निगम में शुक्रवार को आयोजित 17वें अधिवेशन की बैठक उस समय हंगामे और राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गई, जब सदन में पहले बोलने को लेकर भाजपा और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि महिला पार्षदों के बीच धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। सदन में माइक फेंकने, काली पट्टी बांधकर धरना देने और प्रतीकात्मक अर्थी निकालने जैसे घटनाक्रम देखने को मिले।
जानकारी के मुताबिक, नगर निगम सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बसपा पार्षद सुनील शर्मा ने मेयर हेमलता दिवाकर से पहले अपनी बात रखने की अनुमति मांगी। हालांकि, मेयर ने उनसे कहा कि पहले सदन की नियमित कार्यवाही शुरू होने दी जाए, इसके बाद उन्हें बोलने का मौका दिया जाएगा। लेकिन सुनील शर्मा इस बात पर सहमत नहीं हुए और उन्होंने विरोध जताना शुरू कर दिया। इसी दौरान बसपा पार्षद दल के नेता सुनील शर्मा और अन्य पार्षदों ने सदन की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की। विरोध बढ़ने पर बसपा पार्षद यशपाल सिंह ने माइक उठाकर जमीन पर फेंक दिया। इस घटना के बाद भाजपा पार्षदों ने आक्रामक रुख अपना लिया और सदन में ‘गुंडागर्दी नहीं चलेगी’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होने लगी। महिला पार्षदों के बीच भी धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
उधर, बसपा पार्षद सुनील शर्मा ने अपनी आंखों पर काली पट्टी बांध ली और सदन के वेल में जाकर बैठ गए। उनके समर्थन में पार्टी के अन्य पार्षद भी धरने पर बैठ गए। इस विरोध प्रदर्शन के जरिए बसपा पार्षदों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े मुद्दों की अनदेखी पर नाराजगी जताई। पार्षदों का आरोप है कि सदन की बैठकें नियमित रूप से नहीं होतीं और विकास कार्यों से जुड़ी समस्याओं पर भी पर्याप्त चर्चा नहीं की जाती।
भाजपा पार्षदों ने निकाली माइक की अर्थी
सदन में हंगामे के बीच भाजपा पार्षदों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने टूटे हुए माइक की प्रतीकात्मक अर्थी तैयार की और उसे लेकर सदन में प्रदर्शन किया। भाजपा पार्षद राकेश कनौजिया ने अर्थी पर माला चढ़ाकर शोक जताया। इसके बाद भाजपा पार्षद छाती पीट-पीटकर रोने का नाटक करने लगे। इस घटनाक्रम ने सदन के माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया।
मेयर ने बुलाई पुलिस, यशपाल सिंह को किया निष्कासित
लगातार बढ़ते हंगामे के बीच मेयर हेमलता दिवाकर ने कई बार पार्षदों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन उनकी अपील का कोई असर नहीं हुआ। हालात बिगड़ते देख उन्होंने पुलिस बुला ली। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। वहीं, माइक तोड़ने की घटना को गंभीरता से लेते हुए मेयर ने बसपा पार्षद यशपाल सिंह को पूरे सत्र के लिए सदन से निष्कासित कर दिया। हंगामे से नाराज होकर मेयर भी सदन छोड़कर चली गईं। हालांकि, कुछ देर बाद बसपा पार्षद उन्हें मनाकर वापस सदन में लेकर आए, जिसके बाद बैठक की कार्यवाही दोबारा शुरू हो सकी।
148 प्रस्ताव और 41 सवाल भी थे एजेंडे में
गौरतलब है कि इस अधिवेशन में नगर निगम से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी। पार्षदों की ओर से कुल 148 प्रस्ताव और 41 सवाल रखे गए थे। इनमें सफाई कर्मचारियों की भर्ती, नाला सफाई में कथित अनियमितताएं, जलभराव, खराब सड़कों, ई-टेंडरिंग, टोरेंट पावर की रोड कटिंग और मेट्रो निर्माण से प्रभावित रास्तों जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके अलावा शहर के चौराहों के नामकरण, महापुरुषों और शहीदों की प्रतिमाएं लगाने तथा प्रत्येक वार्ड में विकास कार्यों की मांग भी प्रस्तावों में शामिल थी। इससे पहले धनतेरस के दिन बैठक बुलाए जाने को लेकर भी पार्षदों ने नाराजगी जताई थी। ऐसे में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल के बीच शुरू हुआ यह अधिवेशन राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ता नजर आया। अब सवाल यह है कि सदन में हुए इस हंगामे के बीच शहर की बुनियादी समस्याओं और विकास से जुड़े प्रस्तावों पर कितनी प्रभावी चर्चा हो पाती है।
