उजाला / उत्तरप्रदेश
आगरा: त्योहारी सीजन से ठीक पहले आगरा में चीनी की किल्लत ने व्यापारियों और मिठाई कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के थोक बाजार में पिछले सात दिनों से चीनी की नई खेप नहीं पहुंचने के कारण आपूर्ति व्यवस्था चरमराने लगी है। रोजाना करीब 3,000 कुंतल चीनी की खपत वाले शहर में मंगलवार तक थोक विक्रेताओं के पास महज 4,000 से 5,000 कुंतल का स्टॉक बचने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यदि शुक्रवार तक चीनी की नई खेप नहीं पहुंचती है, तो घरेलू रसोई से लेकर मिठाई की दुकानों और पेठा उद्योग तक इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
सात दिन से सप्लाई बंद, स्टॉक खत्म होने का खतरा
त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में चीनी की आपूर्ति बाधित होने से आगरा के व्यापारिक बाजार में संकट गहरा गया है। उपलब्ध स्टॉक और रोजाना की खपत को देखते हुए बाजार में आपूर्ति सामान्य होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। आगरा खंडसारी एंड शुगर डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गिर्राज अग्रवाल के मुताबिक, चीनी मिलें अपना माल चुनिंदा एजेंटों के माध्यम से बेच रही हैं। उनका आरोप है कि मिलों के मासिक रिलीज कोटे की शासन और प्रशासन स्तर पर पर्याप्त जांच नहीं होने के कारण कुछ एजेंट बाजार में कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं। हालांकि, जमाखोरी और सिंडिकेट से जुड़े आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
महाराष्ट्र से भी नहीं पहुंच रही चीनी की खेप
आपूर्ति संकट केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। नूरी गेट के व्यापारी विनोद अग्रवाल ने बताया कि महाराष्ट्र से आने वाली चीनी की आपूर्ति चेन भी प्रभावित है। उनके अनुसार, पिछले सप्ताह महाराष्ट्र से चीनी की एक गाड़ी मंगाई गई थी, लेकिन अब तक उसकी डिलीवरी नहीं हो सकी है। बाहरी राज्यों से आपूर्ति में देरी और स्थानीय थोक बाजार में नई खेप नहीं पहुंचने के कारण कारोबारियों के सामने मांग पूरी करने की चुनौती खड़ी हो गई है। यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो उपलब्ध स्टॉक तेजी से खत्म हो सकता है।
45-46 रुपये के निर्धारित भाव से बाजार में कीमतें ज्यादा
चीनी की कमी का असर कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। व्यापारियों के अनुसार, चीनी मिलों के लिए 45 से 46 रुपये प्रति किलो का भाव निर्धारित होने के बावजूद बाजार में अलग-अलग गुणवत्ता की चीनी इससे अधिक कीमत पर बिक रही है।थोक बाजार में डबल रिफाइंड सफेद चीनी का भाव 59 से 60 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है, जबकि बाजार में इसकी कीमत करीब 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की जानकारी है। वहीं, सिंगल रिफाइंड चीनी लगभग 57 रुपये प्रति किलो और सरकारी मिलों की हल्की गुणवत्ता वाली चीनी 52 से 55 रुपये प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध बताई जा रही है। व्यापारियों की मांग है कि आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी बढ़ाई जाए और कीमतों में मनमानी पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
2,000 से अधिक हलवाई और मिठाई विक्रेता प्रभावित
आगरा में चीनी की किल्लत का सीधा असर 2,000 से अधिक हलवाई और मिठाई विक्रेताओं पर पड़ने की बात कही जा रही है। त्योहारों के दौरान लड्डू, पेड़ा, बर्फी, रसगुल्ला और अन्य मिठाइयों की मांग बढ़ती है। ऐसे में कच्चे माल की कमी उत्पादन और बिक्री दोनों को प्रभावित कर सकती है।
पेठा कारोबारी अमित गोयल के मुताबिक, चीनी उपलब्ध नहीं होने के कारण फैक्ट्रियों में पेठा उत्पादन ठप होने की स्थिति बनने लगी है। आगरा का पेठा शहर की प्रमुख पहचान और महत्वपूर्ण कारोबारी उत्पादों में शामिल है। ऐसे में लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने से उत्पादन, कारोबार और ग्राहकों तक माल पहुंचाने की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। स्वीट्स एंड नमकीन एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार भगत ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि त्योहारों से पहले यदि चीनी की पर्याप्त आवक नहीं बढ़ी, तो मिठाई और नमकीन कारोबार को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रशासन के सामने आपूर्ति सामान्य करने की चुनौती
त्योहारी सीजन में चीनी की बढ़ती मांग को देखते हुए बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना जरूरी है। फिलहाल कारोबारियों की निगाहें शुक्रवार तक संभावित नई खेप पर टिकी हैं। यदि समय रहते आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो कीमतों में और बढ़ोतरी तथा उत्पादन में कमी की आशंका बढ़ सकती है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने, आपूर्ति व्यवस्था की जांच करने और बाजार में कीमतों पर निगरानी रखने की चुनौती है। त्योहार से पहले चीनी का संकट दूर होता है या नहीं, इसका असर आगरा के मिठाई बाजार और पेठा उद्योग के कारोबार पर सीधे तौर पर दिखाई देगा।
