उजाला / उत्तरप्रदेश
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बी-पैक्स (PACS) सहकारी समितियों के कर्मचारियों का नियमित वेतन की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। लखनऊ के ईको गार्डन में 22 अक्टूबर से धरने पर बैठे कर्मचारियों ने सरकार को 1 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि तय समयसीमा तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो प्रदेशभर के समिति कर्मचारी सामूहिक इस्तीफा देकर घर बैठ जाएंगे। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले 13 वर्षों से नियमित वेतन नहीं मिल रहा है, जिसके कारण उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
ईको गार्डन में धरना, सरकार से नियमित वेतन की मांग
PACS कर्मचारियों का धरना मंगलवार को छठे दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि उन्हें हर महीने नियमित रूप से वेतन दिया जाए। उनका कहना है कि वर्षों से वेतन भुगतान की समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। धरने में शामिल कर्मचारियों का आरोप है कि आयुक्त एवं निबंधक कार्यालय के अधिकारियों के साथ बातचीत होने के बावजूद नियमित वेतन को लेकर सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है। कर्मचारियों को अब तक ऐसा कोई लिखित निर्णय भी नहीं मिला है, जिससे उन्हें नियमित वेतन मिलने की उम्मीद बंध सके। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वेतन भुगतान की समस्या का समाधान किए बिना आंदोलन समाप्त करने का सवाल नहीं उठता। इसी वजह से उन्होंने सरकार को 1 नवंबर तक का समय दिया है।

‘सरकार वेतन का इंतजाम कहीं से भी करे, भुगतान नियमित हो’
सरकारी समिति के अध्यक्ष अरविंद सिंह चौहान ने कहा कि कर्मचारियों की सबसे बड़ी और प्रमुख मांग नियमित वेतन है। सरकार वेतन का इंतजाम किस मद से करती है, यह उसका विषय है। कर्मचारियों को हर महीने उनका वेतन मिलना चाहिए। चौहान के मुताबिक, कर्मचारियों को दूसरी मांगों का हवाला देकर मुख्य मुद्दे से नहीं भटकाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि नियमित वेतन के अभाव में कर्मचारी लंबे समय से आर्थिक परेशानियां झेल रहे हैं। कई कर्मचारियों का लाखों रुपये वेतन बकाया है, जबकि कुछ कर्मचारियों को दो से चार महीने का वेतन मिलने के बाद दोबारा भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। कर्मचारियों का कहना है कि नियमित वेतन किसी अतिरिक्त सुविधा की मांग नहीं, बल्कि उनकी आजीविका से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। परिवार की जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।
अधिकारियों से हुई बातचीत, लेकिन नहीं निकला समाधान
मंगलवार को आयुक्त एवं निबंधक कार्यालय के अधिकारी धरनास्थल पर पहुंचे और कर्मचारियों से बातचीत की। इस दौरान कर्मचारियों की पहले से उठाई गई अन्य मांगों को पूरा करने की बात कही गई। हालांकि, कर्मचारियों के अनुसार नियमित वेतन के मुद्दे पर अधिकारियों की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। अरविंद सिंह चौहान ने बताया कि कर्मचारियों की पहले की मांगों में दो समितियों का अतिरिक्त प्रभार संभालने पर यात्रा भत्ते के रूप में पांच-पांच हजार रुपये देने, प्रकीर्ण खाते से पांच हजार रुपये तक की राशि बिना किसी अधिकारी की संस्तुति के निकालने की सुविधा देने और सातवें वेतनमान से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि इन मांगों और नियमित वेतन के सवाल को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि अन्य समस्याओं का समाधान होने से नियमित वेतन की समस्या अपने आप खत्म नहीं होगी।

1 नवंबर के बाद क्या होगा? आंदोलन पर टिकी निगाहें
PACS कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 1 नवंबर तक नियमित वेतन की मांग पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर के कर्मचारी सामूहिक इस्तीफा देकर घर बैठ जाएंगे। इस चेतावनी के बाद आंदोलन को लेकर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे उन्हें हर महीने समय पर वेतन मिल सके और भविष्य में भुगतान को लेकर अनिश्चितता न रहे। उनका जोर इस बात पर है कि केवल आश्वासन देने के बजाय नियमित वेतन भुगतान की स्पष्ट व्यवस्था लागू की जाए। फिलहाल, कर्मचारियों का धरना जारी है और वे अपनी मुख्य मांग पर लिखित निर्णय चाहते हैं। अब देखना होगा कि सरकार 1 नवंबर की समयसीमा से पहले इस मामले में क्या कदम उठाती है और वर्षों से वेतन भुगतान की समस्या का सामना कर रहे PACS कर्मचारियों को राहत मिल पाती है या नहीं।
