उजाला/उत्तरप्रदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, काटने और मतदाताओं के विवरण में कथित गड़बड़ियों को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोमवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और निर्वाचन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भाजपा ने अपने 13 लाख वोटर बढ़वाए हैं, जबकि पीलीभीत समेत कई जिलों में मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संजय सिंह ने मतदाता सूची में दर्ज कुछ नामों और उनके विवरण में कथित गलतियों का मुद्दा उठाते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की प्रतिक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी लगातार मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रही है, लेकिन इन शिकायतों पर स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।
मतदाता सूची में नामों की गलतियों पर उठाए सवाल
संजय सिंह के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के पूर्वांचल प्रांत अध्यक्ष राजेश यादव ने मतदाता सूची में दर्ज कुछ नामों और उनके विवरण में कथित त्रुटियों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम के कॉलम में आपत्तिजनक या गलत शब्द दर्ज किए गए हैं। संजय सिंह ने उदाहरण देते हुए कहा कि मतदाता सूची में ‘राम ने यादव को मारा’ जैसी एंट्री सामने आई है। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि ‘मोहम्मद इकबाल बेग’ नाम को गलत तरीके से ‘मोहम्मद इकबाल भीख मांगते हैं’ लिखा गया। उनके अनुसार, इस तरह की कथित गलतियां मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। आप सांसद ने सवाल किया कि यदि मतदाता सूची में इस तरह की त्रुटियां दर्ज हो रही हैं, तो उनकी जांच और सुधार की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इन मामलों की जांच कराकर संबंधित प्रविष्टियों को दुरुस्त करने की मांग की।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी की प्रतिक्रिया पर जताई आपत्ति
संजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की ओर से सोशल मीडिया पर दी गई प्रतिक्रिया पर भी नाराजगी जताई। उनके अनुसार, मतदाता सूची में दर्ज गलतियों को लेकर उठाए गए सवालों के जवाब में सॉफ्टवेयर के जातिवादी नहीं होने और गलती के दौरान जातिगत भेदभाव नहीं होने जैसी बातें कही गईं। आप सांसद ने इस प्रतिक्रिया में अल्पसंख्यक समुदाय का उल्लेख किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को मतदाता सूची से जुड़े सवालों का जवाब तथ्यों और तर्कों के आधार पर देना चाहिए। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इस तरह की प्रतिक्रिया संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
13 लाख वोट बढ़ने और नाम काटे जाने का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और उसमें हुए बदलावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य में करीब 13 लाख नाम जोड़े गए हैं और दूसरी ओर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने पीलीभीत समेत कई क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगाया। संजय सिंह ने कहा कि कुछ स्थानों पर मतदाता पहचान पत्र यानी ईपीआईसी (EPIC) नंबर से संबंधित गड़बड़ियों और नामों में बदलाव की शिकायतें भी सामने आई हैं।
उन्होंने पीलीभीत, बिस्वा, तरबगंज और जहानाबाद सहित कई क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची में हुए बदलावों का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर न हो।
निर्वाचन आयोग से जांच और स्पष्ट जवाब की मांग
संजय सिंह ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में उसमें दर्ज नामों, पते और अन्य विवरणों की शुद्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से कथित गलतियों की जांच कराने, नाम जोड़ने और हटाने के आंकड़े स्पष्ट करने तथा शिकायतों पर उचित कार्रवाई करने की मांग की। फिलहाल, भाजपा द्वारा कथित तौर पर 13 लाख वोटर बढ़वाने, मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने और मतदाता सूची में गड़बड़ियों से जुड़े संजय सिंह के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों, संबंधित शिकायतों और जांच के निष्कर्षों का सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
