फतेहपुर ब्लास्ट: सिलिंडर, बैटरी या बारूद? दो मंजिला मकान की छत ढही, 5 की मौत

उजाला / फतेहपुर: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के मलवां कस्बे में सोमवार शाम एक दो मंजिला मकान में हुए भीषण धमाके से हड़कंप मच गया। धमाके के बाद मकान की दूसरी मंजिल की आरसीसी छत भरभराकर नीचे गिर गई। हादसे में मलबे में दबकर पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि एक महिला के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद रेस्क्यू टीमों ने घंटों मशक्कत कर मलबा हटाया।

मकान फल कारोबारी सुरेश गुप्ता का बताया जा रहा है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में रसोई गैस सिलिंडर में आग लगने और उसके बाद धमाका होने की बात सामने आई है। हालांकि, दूसरी मंजिल की छत को हुए भारी नुकसान को देखते हुए सिलिंडर, सोलर बैटरी या किसी अन्य कारण की संभावना की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मलबा पूरी तरह हटने और जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

धमाके के बाद ढह गई दूसरी मंजिल की छत

हादसा उस समय हुआ जब मकान के निचले हिस्से में खाना बनाया जा रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक गैस पाइप में रिसाव के बाद सिलिंडर में आग लगी और फिर तेज धमाका हुआ। धमाका इतना जोरदार था कि दूसरी मंजिल की करीब 30 फीट लंबी और 20 फीट चौड़ी आरसीसी छत भरभराकर नीचे आ गई।

बताया जा रहा है कि दूसरी मंजिल का यह हिस्सा हाल ही में बनाया गया था। यहां सोलर पैनल लगे हुए थे और उनकी चार लिथियम बैटरियां भी रखी थीं। इसी वजह से जांच टीम यह भी देख रही है कि कहीं बैटरियों से जुड़ी किसी तकनीकी वजह का हादसे में कोई संबंध तो नहीं था।

आतिशबाजी के कारोबार की भी चर्चा

हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आई कि मकान मालिक सुरेश गुप्ता आतिशबाजी के कारोबार से जुड़े हैं और दीपावली के समय आतिशबाजी खरीदकर बेचते हैं। इसके चलते पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं मकान में आतिशबाजी या कोई ज्वलनशील सामग्री तो मौजूद नहीं थी।

हालांकि, पुलिस के मुताबिक फिलहाल मौके से बारूद जैसी कोई सामग्री सामने नहीं आई है। एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने प्रथम दृष्टया रसोई गैस सिलिंडर से हादसा होने की बात कही है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य संभावित कारणों की जांच की जा रही है।

दूसरी मंजिल पर बच्चे भी मौजूद थे

ग्रामीणों के मुताबिक हादसे के समय दूसरी मंजिल पर बच्चे भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि वे अपने लिए मैगी बना रहे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, घर के सदस्य कभी-कभी दूसरी मंजिल पर गैस सिलिंडर से खाना भी बना लेते थे।

दूसरी मंजिल की छत ढहने के बाद मलबे में कई लोग दब गए। ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी और खुद भी राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए।

ढाई घंटे बाद पहुंच सकी जेसीबी

घनी आबादी के बीच मकान होने के कारण रेस्क्यू अभियान में भी काफी दिक्कत आई। दमकल की गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में परेशानी हुई। जेसीबी को भी पीछे के रास्ते से लाया गया। रास्ता बनाने के लिए आसपास के कुछ घरों के चबूतरे और टिनशेड तक हटाने पड़े।

बिजली के तारों और संकरे रास्तों के कारण राहत कार्य प्रभावित हुआ। करीब सात बजे जेसीबी मौके पर पहुंची, जिसके बाद मलबा हटाने का काम तेज किया गया।

लखनऊ से पहुंची SDRF की टीम

हादसे की गंभीरता को देखते हुए सोमवार रात करीब 10 बजे लखनऊ से SDRF की टीम भी मौके पर पहुंची। स्थानीय पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें पहले से रेस्क्यू में जुटी थीं। एडीएम विनय पांडेय समेत प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे।

रेस्क्यू के दौरान चार एंबुलेंस भी मौके पर पहुंचीं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। डीएम और एसपी ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर घायलों का हाल जाना।

महिलाओं ने घर से निकलकर बचाई जान

हादसे के बाद गृहस्वामिनी उमा देवी, उनकी देवरानी पूजा और बेटी लक्ष्मी बदहवास नजर आईं। ग्रामीणों के मुताबिक, गैस सिलिंडर में आग लगने के बाद वे समय रहते घर से बाहर निकल आई थीं। इस वजह से वे बड़े हादसे की चपेट में आने से बच गईं।

बताया जा रहा है कि सूरज और आलोक ने करीब छह महीने पहले मकान के हिस्से का निर्माण कराया था। हादसे में परिवार के सदस्यों की मौत के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

सीएम योगी ने जताया दुख

फतेहपुर हादसे में हुई जनहानि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया है। उन्होंने अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने और घायलों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की जानकारी दी गई है।

फिलहाल पुलिस और SDRF की टीम हादसे की वजह की जांच में जुटी है। मलबा पूरी तरह हटने और तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फतेहपुर का यह भीषण हादसा सिर्फ गैस सिलिंडर के कारण हुआ या इसमें सोलर बैटरी अथवा कोई अन्य कारण भी शामिल था।

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