उजाला / उत्तरप्रदेश
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कक्षा एक से आठ तक के सभी शिक्षकों को अपने नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक योग्यता से संबंधित दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने कुसुमलता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। इस मामले में एसटीएफ की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और दस्तावेजों के सत्यापन में सहयोग नहीं किए जाने का मुद्दा प्रमुख रहा।
एसटीएफ की जांच के आधार पर सामने आया मामला
मामले के अनुसार, स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के अपर पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिले निर्देशों के आधार पर याची कुसुमलता के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच की जा रही थी। जांच से संबंधित जानकारी में बताया गया कि गोरखपुर के कोदीपुर स्थित कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय बैरीपार में तैनात सहायक अध्यापिका कुसुमलता श्रीवास्तव के शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल करके याची ने नौकरी हासिल की थी। इस आरोप की पुष्टि और दस्तावेजों की वास्तविकता का पता लगाने के लिए एसटीएफ की ओर से याची को अपने समक्ष उपस्थित होकर शैक्षणिक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, याची 12 और 13 अक्टूबर को एसटीएफ के समक्ष पेश नहीं हुईं। उन्होंने सत्यापन के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता से संबंधित दस्तावेज भी जमा नहीं किए।
ऑपरेशन के कारण पेश नहीं होने की दी गई जानकारी
पिछली सुनवाई के दौरान याची की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि ऑपरेशन होने के कारण वह बेड रेस्ट पर हैं। इसी वजह से वह निर्धारित तारीखों पर एसटीएफ के समक्ष उपस्थित नहीं हो सकीं। मामले में अदालत के सामने एक ओर याची की अनुपस्थिति का कारण रखा गया, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसी के समक्ष शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने का विषय भी सामने आया। ऐसे मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि नियुक्ति की वैधता का निर्धारण संबंधित शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और भर्ती प्रक्रिया के रिकॉर्ड के आधार पर किया जाता है। हालांकि, केवल निर्धारित तारीख पर उपस्थित नहीं होने से किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोप अपने आप साबित नहीं हो जाते। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाएगा।
एक ही दस्तावेज पर कई लोगों की नौकरी का दावा
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एसटीएफ की जांच में सामने आए व्यापक फर्जीवाड़े के आरोपों पर भी ध्यान दिया। कोर्ट के समक्ष बताया गया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने कथित तौर पर जाली शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की है। जांच में ऐसे मामले भी सामने आने की बात कही गई, जिनमें एक ही शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर 10 या उससे अधिक लोग नौकरी कर रहे हैं। यदि जांच में ऐसे आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, अभ्यर्थियों की योग्यता के सत्यापन और सरकारी नियुक्तियों की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय होगा। ऐसे मामलों में यह पता लगाना जरूरी है कि संबंधित प्रमाणपत्र असली हैं या नहीं, उनका इस्तेमाल किन लोगों ने किया और नियुक्ति के समय दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई थी।
शिक्षकों के दस्तावेजों के सत्यापन पर बढ़ेगा जोर
हाईकोर्ट के निर्देश का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन को आगे बढ़ाना है। नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि नियुक्ति निर्धारित नियमों और आवश्यक योग्यताओं के अनुसार हुई थी या नहीं। इस मामले में आगे की कार्रवाई एसटीएफ की जांच, संबंधित दस्तावेजों और अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, मामले से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल यही है कि कथित तौर पर एक ही शैक्षणिक प्रमाणपत्र का इस्तेमाल करके कई लोगों की नियुक्ति कैसे हुई और सत्यापन प्रक्रिया में किसी प्रकार की चूक हुई या नहीं।
