मां चंद्रिका देवी मंदिर में नवरात्र पर नहीं होंगे दर्शन

CHANDRIKA DEVI

उजाला / उत्तर प्रदेश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र स्थित कठवारा गांव में मां चंद्रिका देवी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अहम खबर है। गोमती नदी में आई बाढ़ के कारण मंदिर के चारों ओर पानी भर गया है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर को भक्तों के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से नवरात्र में मां के दर्शन की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं को निराश होकर लौटना पड़ सकता है। शनिवार को अमावस्या के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां चंद्रिका देवी के दर्शन करने मंदिर पहुंचे, लेकिन उन्हें मुख्य द्वार से ही वापस लौटना पड़ा। मंदिर के बाहर तैनात पुलिसकर्मियों ने लोगों को जलभराव की स्थिति और संभावित खतरे की जानकारी देते हुए आगे जाने से रोक दिया।

बाढ़ के पानी से मंदिर तक पहुंचना मुश्किल

मां चंद्रिका देवी मंदिर के आसपास गोमती नदी का पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ है। मंदिर तक पहुंचने वाले रास्तों पर जलभराव के कारण श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रशासन का मानना है कि ऐसी स्थिति में लोगों को मंदिर परिसर तक जाने की अनुमति देना जोखिम भरा हो सकता है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मंदिर परिसर के बाहर पुलिस, महिला पुलिस और पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है। इनकी जिम्मेदारी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे श्रद्धालुओं को रोकना और उन्हें मौजूदा स्थिति की जानकारी देना है।

समिति और पुलिस प्रशासन की बैठक में हुआ फैसला

मां चंद्रिका देवी मेला विकास समिति और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की संयुक्त बैठक शुक्रवार को खाटू श्याम मंदिर परिसर में आयोजित की गई। बैठक में गोमती नदी की बाढ़ से पैदा हुई स्थिति, मंदिर तक पहुंचने वाले रास्तों की सुरक्षा और मेले से जुड़े दुकानदारों की समस्याओं पर चर्चा की गई। स्थिति का आकलन करने के बाद नवरात्र के दौरान मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया। समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है और जब तक मंदिर तक पहुंचने के रास्ते सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक दर्शन शुरू करना उचित नहीं होगा।

घरों में घट स्थापना कर पूजा करने की अपील

मां चंद्रिका देवी मेला विकास समिति के अध्यक्ष अखिलेश सिंह चौहान और महामंत्री अनुराग तिवारी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे शारदीय नवरात्र के दौरान अपने घरों में ही घट स्थापना करें और विधि-विधान से मां की पूजा-अर्चना करें। समिति पदाधिकारियों के मुताबिक, यदि बाढ़ का पानी कम होता है और मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते सुरक्षित हो जाते हैं, तो प्रशासन और समिति मिलकर स्थिति की समीक्षा करेंगे। इसके बाद ही मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

मंदिर में पूजा और आरती जारी, दर्शन पर रोक

मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई है, लेकिन धार्मिक परंपराओं का पालन किया जा रहा है। पुजारियों की ओर से निर्धारित समय और परंपरा के अनुसार मां का शृंगार, पूजन और आरती की जा रही है। वहीं, मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर खाटू श्याम मंदिर और चंदनकुंड गांव तक मेले से जुड़ी दुकानें भी लगी हुई हैं। हालांकि, बाढ़ की स्थिति के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही और मेले की गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।

पानी उतरने के बाद होगा आगे का फैसला

फिलहाल प्रशासन और मेला विकास समिति की नजर गोमती नदी के जलस्तर तथा मंदिर तक पहुंचने वाले रास्तों की स्थिति पर है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचें और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें। मंदिर में दोबारा दर्शन कब शुरू होंगे, इस बारे में अभी कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है। बाढ़ का पानी उतरने और रास्तों के सुरक्षित होने के बाद ही स्थिति की समीक्षा कर अगला फैसला लिया जाएगा। ऐसे में श्रद्धालुओं को मंदिर जाने से पहले प्रशासन और मेला समिति की ओर से जारी होने वाली नई जानकारी पर ध्यान देना चाहिए।

 

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