उजाला / देश
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के नाम को लेकर राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने बुधवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि राज्य का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ (Paschim Banga) किया जाएगा। इसके लिए विधानसभा के पहले सत्र में विधेयक पेश करने की बात कही गई है। हालांकि, फिलहाल यह एक प्रस्ताव है और नाम परिवर्तन के लिए विधायी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। शमिक भट्टाचार्य ने नाम बदलने को लेकर दोबारा सवाल पूछे जाने पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब राज्य का नाम ‘पश्चिम बंग’ ही होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस मुद्दे पर बार-बार स्पष्टीकरण देने की जरूरत नहीं है। इससे पहले भी वह कह चुके हैं कि सरकार जल्द ही विधानसभा में नाम परिवर्तन से संबंधित विधेयक लेकर आएगी।
‘बांग्ला’ और ‘बंगा’ नाम भी नहीं होंगे
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक, राज्य के नाम को लेकर ‘बांग्ला’, ‘बंगा’ या ‘वेस्ट बंगाल’ जैसे नामों का इस्तेमाल आगे नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि राज्य का नाम उसकी ऐतिहासिक पहचान और अतीत से जुड़ा होना चाहिए। इसी सोच के तहत Paschim Banga नाम को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। शमिक भट्टाचार्य ने अगस्त 2026 में राज्यसभा में भी पश्चिम बंगाल का नाम ‘पश्चिम बंग’ करने की मांग उठाई थी। उस दौरान उन्होंने मौजूदा ‘West Bengal’ नाम को राज्य के इतिहास और 1947 के विभाजन से जोड़ते हुए नाम परिवर्तन की आवश्यकता बताई थी।
पहले भी हो चुकी है नाम बदलने की कोशिश
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने का मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस सरकार ने राज्य का नाम ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया था और विधानसभा में इससे संबंधित विधेयक भी पारित किया गया था। हालांकि, केंद्र की मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह बदलाव लागू नहीं हो सका। अब बीजेपी सरकार की ओर से ‘पश्चिम बंग’ नाम का प्रस्ताव सामने आया है।बीजेपी का तर्क है कि नया नाम राज्य के इतिहास और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप होना चाहिए। वहीं, इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से अलग राय सामने आई है। टीएमसी नेता कुणाल घोष ने राज्य का नाम ‘बांग्ला’ किए जाने की वकालत की है। ऐसे में नाम परिवर्तन का मुद्दा आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।
वाराणसी में ‘पश्चिम बंग भवन’ की भी योजना
नाम परिवर्तन के साथ ही वाराणसी में ‘पश्चिम बंग भवन’ बनाने की योजना का भी जिक्र सामने आया है। शमिक भट्टाचार्य के अनुसार, राज्य के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग, केंद्र सरकार और कूचबिहार राजपरिवार के वंशजों के सहयोग से इस परियोजना की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित भवन का इस्तेमाल सांस्कृतिक केंद्र के साथ-साथ बंगाल से वाराणसी आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए किया जा सकेगा। फिलहाल निगाहें विधानसभा पर हैं। यदि सरकार विधेयक पेश करती है और वह विधानसभा से पारित होता है, तो इसके बाद नाम परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में आने वाले विधानसभा सत्र में ‘पश्चिम बंग’ नाम का प्रस्ताव पश्चिम बंगाल की राजनीति का अहम मुद्दा बन सकता है।
