कानपुर में 28 थोक दवा फर्मों के लाइसेंस रद्द

KANPUR

उजाला / उत्तरप्रदेश

कानपुर: शहर में नशीली दवाओं के कारोबार और नियमों की अनदेखी करने वाली दवा फर्मों के खिलाफ औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने जांच के बाद 28 थोक दवा फर्मों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। इनमें 12 फर्मों के नशीली दवाओं की बिक्री से जुड़े होने के साक्ष्य मिले हैं, जबकि 16 फर्म ऐसी पाई गईं, जो कागजों पर संचालित हो रही थीं।

औषधि विभाग की यह कार्रवाई 3,270 दवा फर्मों की जांच और सत्यापन के बाद की गई है। बताया गया है कि अगस्त 2025 में अग्रवाल ब्रदर्स के यहां कोडीनयुक्त कफ सिरप जैसे नशीले सिरप मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने दवा फर्मों के सत्यापन और जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग की टीमों ने कानपुर में अभियान चलाकर थोक दवा कारोबारियों के दस्तावेज और प्रतिष्ठानों का सत्यापन शुरू किया। अभियान के दौरान बिरहाना रोड, कल्याणपुर, लालबंगला समेत शहर के कई इलाकों में दवा फर्मों की जांच की गई। जांच में कुछ फर्मों के लाइसेंस और दस्तावेज तो मौजूद मिले, लेकिन मौके पर संबंधित दुकान या गोदाम का संचालन नहीं पाया गया। विभागीय टीम जब दस्तावेजों में दर्ज पते पर पहुंची तो कई स्थानों पर दुकान मालिकों ने किसी दवा फर्म या गोदाम के संचालन की जानकारी होने से इनकार कर दिया।

जांच के आधार पर 16 फर्मों को कागजों पर संचालित पाया गया। वहीं, 12 अन्य फर्मों के माध्यम से नशीली दवाओं के कारोबार से जुड़े साक्ष्य सामने आने की बात कही गई है। कार्रवाई की सूची में अग्रवाल ब्रदर्स, सिसोदिया, प्रेमा, माया फर्म, मेडिसिना, मसाइको, कुमार मेडिकल स्टोर, मां दुर्गा मेडिकोज, श्री बालाजी, आरएस हेल्थकेयर, एएस हेल्थकेयर और एसजीपीएस समेत 28 फर्म शामिल हैं। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिन फर्मों का वास्तविक संचालन नहीं हो रहा था, उन्हें लाइसेंस सरेंडर करने के लिए समय भी दिया गया था। इसके बावजूद संबंधित फर्मों ने लाइसेंस सरेंडर नहीं किए। विभाग को आशंका है कि कुछ मामलों में लाइसेंस का इस्तेमाल नशीली दवाओं के कारोबार के लिए किया जा सकता है। हालांकि, 28 फर्मों में से 16 के नाम औषधि विभाग की ओर से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। सूत्रों का दावा है कि इन नामों को सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभागीय कार्रवाई फरवरी से सितंबर 2026 के बीच की गई जांच से संबंधित बताई जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि शासन के निर्देश पर लाइसेंस निरस्त किए गए हैं और जांच अभियान अभी जारी है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर अन्य दवा फर्मों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। विभाग अब यह भी सत्यापित कर रहा है कि लाइसेंस के आधार पर संचालित होने वाली दवा फर्में वास्तव में निर्धारित पते पर मौजूद हैं या नहीं और उनके माध्यम से किसी प्रकार का प्रतिबंधित या नशीली दवाओं का कारोबार तो नहीं किया जा रहा है।

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