उजाला / पुरी: ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में बुधवार, 30 सितंबर 2026 को श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सूचना सामने आई है। मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की विशेष ‘बनकलागी नीति’ संपन्न की जाएगी। इस धार्मिक अनुष्ठान के चलते आम श्रद्धालुओं के लिए कुछ घंटों तक भगवान के दर्शन बंद रहेंगे।
जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की ओर से जारी सूचना के अनुसार, 30 सितंबर को शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन अस्थायी रूप से बंद रहेंगे। इस दौरान मंदिर के गर्भगृह में निर्धारित धार्मिक परंपरा के अनुसार बनकलागी नीति संपन्न की जाएगी।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के समय को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं, ताकि मंदिर पहुंचने के बाद उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक बंद रहेंगे दर्शन
मंदिर प्रशासन के मुताबिक, अश्विन कृष्ण चतुर्थी तिथि के अवसर पर भगवान की बनकलागी नीति संपन्न की जाएगी। यह विशेष अनुष्ठान दूसरे भोग मंडप के भोग के पूरा होने के बाद शुरू होगा।
बनकलागी नीति के दौरान श्रीमंदिर के गर्भगृह के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं। इसलिए इस अवधि में मंदिर आने वाले भक्त भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के सार्वजनिक दर्शन नहीं कर सकेंगे।
दर्शन बंद रहने का समय: शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक।
अनुष्ठान पूरा होने के बाद मंदिर की निर्धारित धार्मिक प्रक्रिया के अनुसार आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन दोबारा शुरू किए जाएंगे।
क्या है बनकलागी नीति?
बनकलागी नीति को श्रीमुख श्रृंगार के नाम से भी जाना जाता है। यह श्री जगन्नाथ मंदिर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इस रस्म के दौरान रत्न सिंहासन पर विराजमान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान सुदर्शन के श्रीमुख का विशेष श्रृंगार किया जाता है।
इस धार्मिक प्रक्रिया में देवी-देवताओं के चेहरे पर प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करके उनके श्रीमुख का श्रृंगार किया जाता है। इसे मंदिर की विशेष और गोपनीय सेवाओं में शामिल माना जाता है।
बनकलागी नीति मंदिर की पारंपरिक सेवायत व्यवस्था के तहत संपन्न की जाती है। इस सेवा से जुड़े दत्ता महापात्र सेवायत परंपरा के अनुसार अनुष्ठान को पूरा करते हैं।
कई घंटे चलती है विशेष धार्मिक रस्म
बनकलागी नीति को पूरा करने में कई घंटे लग सकते हैं। इस दौरान आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में प्रवेश और दर्शन की अनुमति नहीं होती। मंदिर की धार्मिक परंपरा और निर्धारित सेवा प्रक्रिया के अनुसार अनुष्ठान पूरा होने के बाद ही दर्शन व्यवस्था सामान्य होती है।
इस दौरान भगवान के श्रीमुख के श्रृंगार के लिए प्राकृतिक सामग्री और पारंपरिक रंगों का उपयोग किया जाता है। यही वजह है कि इस विशेष सेवा के दौरान आम दर्शन को अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है।
श्रद्धालु यात्रा से पहले समय जरूर ध्यान रखें
30 सितंबर को पुरी जगन्नाथ मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे जरूरी बात दर्शन का समय है। यदि कोई भक्त शाम के समय मंदिर पहुंचने की योजना बना रहा है तो उसे शाम 6 बजे से रात 10 बजे के बीच सार्वजनिक दर्शन बंद रहने की जानकारी ध्यान में रखनी चाहिए।
मंदिर प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे बनकलागी नीति के निर्धारित समय के अनुसार अपनी यात्रा और दर्शन की योजना बनाएं।
दर्शन बंद रहने की अवधि में मंदिर की निर्धारित धार्मिक सेवाएं जारी रहेंगी। अनुष्ठान पूरा होने और आवश्यक प्रक्रिया संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन फिर से शुरू किए जाएंगे।
इसलिए पुरी जाने वाले भक्तों के लिए सलाह है कि वे मंदिर पहुंचने से पहले दर्शन के समय और मंदिर प्रशासन की ताजा सूचना जरूर जांच लें। इससे भीड़ और प्रतीक्षा के दौरान होने वाली परेशानी से बचने में मदद मिल सकती है।
