उजाला / प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के ट्रैक पर लोहे की भारी रेलिंग रखे जाने का मामला सामने आया है। 21 सितंबर की शाम न्यू करछना स्टेशन के पास किलोमीटर संख्या 272/7 पर करीब सात फीट लंबी लोहे की रेलिंग ट्रैक पर पड़ी मिली। गुजर रही ट्रेन का इंजन इस रेलिंग से टकरा गया। लोको पायलट ने समय रहते ट्रेन रोक दी, जिसके बाद संभावित बड़े हादसे को टाला जा सका। घटना को लेकर DFC अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद रेलवे सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, रेलिंग को ट्रैक पर इस तरह रखा गया था कि उसके ऊपर से ट्रेन गुजरने पर इंजन और रेल परिचालन को नुकसान पहुंचने का खतरा था। हालांकि, यह रेलिंग किसने और किस उद्देश्य से ट्रैक पर रखी, इसका खुलासा अभी जांच में होना बाकी है।
इंजन से टकराई लोहे की रेलिंग
बताया गया है कि 21 सितंबर को शाम करीब 7:15 बजे ट्रेन DFC ट्रैक के किलोमीटर 272/7 के पास पहुंची। इसी दौरान इंजन लोहे की रेलिंग से टकरा गया। टक्कर की आवाज सुनते ही ड्यूटी पर तैनात लोको पायलट ने सतर्कता दिखाते हुए ट्रेन को रोक दिया।
ट्रेन रुकने के बाद घटना की जानकारी अधिकारियों को दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 7:25 बजे लोको पायलट ने संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले की सूचना दी। इसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने ट्रैक से लोहे की रेलिंग हटाई और रेल परिचालन को सुरक्षित करने की कार्रवाई की।
DFC कर्मचारी ने दर्ज कराई शिकायत
घटना के संबंध में DFC के न्यू करछना क्षेत्र में तैनात कार्यकारी सिविल सुरक्षा कर्मचारी अमित कुमार मिश्र की ओर से घूरपुर थाने में शिकायत दी गई। उनका कार्यक्षेत्र DFC के किलोमीटर संख्या 271 से 280 के बीच बताया गया है।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ट्रैक पर भारी लोहे की रेलिंग कैसे पहुंची और इसे वहां रखने के पीछे किसका हाथ था।
रेलवे ट्रैक पर वस्तु रखने की जांच
जांच एजेंसियां घटना से जुड़े सभी पहलुओं को देख रही हैं। ट्रैक के आसपास मौजूद परिस्थितियों, घटनास्थल और संबंधित जानकारी के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रेलिंग को वहां जानबूझकर रखा गया था या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे कौन लोग थे और उनका उद्देश्य क्या था। फिलहाल मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
समय रहते रुक गई ट्रेन
इस घटना में सबसे अहम पहलू लोको पायलट की सतर्कता रहा। रेलिंग से इंजन के टकराने के बाद ट्रेन को तुरंत रोक दिया गया। अगर ट्रेन आगे बढ़ती रहती तो रेलिंग के कारण इंजन और ट्रैक को नुकसान पहुंचने की आशंका हो सकती थी।
DFC के अधिकारियों की ओर से घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। मामले की जांच के साथ ट्रैक की सुरक्षा और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।
DFC ट्रैक की सुरक्षा पर उठे सवाल
DFC देश में मालगाड़ियों के लिए विकसित महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क का हिस्सा है। ऐसे में ट्रैक पर भारी वस्तु रखे जाने की घटना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मानी जा रही है। प्रयागराज की इस घटना ने ट्रैक की निगरानी और संवेदनशील हिस्सों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान खींचा है।
फिलहाल पुलिस अज्ञात लोगों की पहचान करने में जुटी है। जांच के बाद ही यह सामने आएगा कि ट्रैक पर सात फीट लंबी लोहे की रेलिंग किसने रखी और इसके पीछे वास्तविक मंशा क्या थी।
नोट: इस मामले में “ट्रेन पलटाने की साजिश” फिलहाल जांच का विषय है। पुलिस की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष आने तक इसे आरोप या आशंका के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
