‘नीला गमछा ही नहीं, पूरे शरीर पर नीला रंग लगा लें’, ब्रजेश पाठक का सपा पर हमला

उजाला / लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी बीच नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर भी तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कई आरोप लगाए हैं।

ब्रजेश पाठक ने सपा के नीले रंग के इस्तेमाल को लेकर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी नीला गमछा ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर पर नीला रंग लगा ले, लेकिन जनता सब जानती है। उन्होंने सपा पर अराजकता, दलितों के साथ अत्याचार और माफिया को बढ़ावा देने जैसे आरोप भी लगाए। ये आरोप ब्रजेश पाठक की राजनीतिक टिप्पणियों के रूप में सामने आए हैं।

‘सपा का इतिहास गुंडई और अरा जकता का’

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सपा पर निशाना साधते हुए पार्टी के राजनीतिक इतिहास को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सपा की स्थिति खतरे के समय रेत में चोंच छिपाने वाले शुतुरमुर्ग जैसी है।

पाठक ने आरोप लगाया कि सपा का इतिहास गुंडई और अराजकता से जुड़ा रहा है और पार्टी के सत्ता में रहने के दौरान दलितों पर अत्याचार बढ़े। उन्होंने सपा पर चुनाव के दौरान अलग-अलग राजनीतिक प्रतीकों और पहचान का इस्तेमाल कर वोट मांगने का आरोप लगाया।

इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि सपा वाले “नीला गमछा ही नहीं, पूरे शरीर पर नीला रंग लगा लें लेकिन जनता सब जानती है।”

‘सपा अपने नाम से वोट मांगे तो…’

ब्रजेश पाठक ने सपा की चुनावी रणनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि यदि समाजवादी पार्टी अपने नाम और पहचान के आधार पर चुनाव में वोट मांगेगी तो उसकी स्थिति खराब होगी। उन्होंने पार्टी पर ‘बहरूपिया’ बनकर वोट मांगने का आरोप लगाया।

डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार दलित महापुरुषों की मूर्तियों और पार्कों को सजाने-संवारने का काम कर रही है। उन्होंने सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात भी कही और दावा किया कि गरीबों को मुख्यधारा में लाने के लिए काम किया जा रहा है।

अंबेडकर प्रतिमाओं के आंकड़ों पर भी पलटवार

ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाए जाने से जुड़े दावों पर भी प्रतिक्रिया दी। पाठक ने इन आंकड़ों को मनगढ़ंत बताया और दावा किया कि इन्हें सपा की सोशल मीडिया टीम ने तैयार किया है।

हालिया रिपोर्टों में अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश में आंबेडकर की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाए जाने से जुड़ा आंकड़ा बताए जाने और उस पर ब्रजेश पाठक की प्रतिक्रिया का उल्लेख है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के राजनीतिक दावे अलग-अलग हैं।

‘सपा माफियाओं को प्रमोट करती रही’

सपा के खिलाफ लगाए गए आरोपों और पोस्टरों से जुड़े सवाल पर भी ब्रजेश पाठक ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी माफियाओं को बढ़ावा देती रही है और महिलाओं के सम्मान से जुड़े मामलों में भी उसकी भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं।

उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती का जिक्र करते हुए सपा और मायावती के बीच पुराने राजनीतिक विवाद की ओर भी इशारा किया। पाठक ने यह भी आरोप लगाया कि सपा से जुड़े लोगों ने डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध संदर्भों में नहीं हुई है।

2027 चुनाव से पहले तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सपा, भाजपा और बसपा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता लगातार एक-दूसरे की नीतियों और रणनीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। हाल के दिनों में PDA, नीला रंग, दलित राजनीति और डॉ. आंबेडकर से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में रहे हैं।

ब्रजेश पाठक की ताजा टिप्पणी भी इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में सपा या अखिलेश यादव की ओर से ब्रजेश पाठक की इन सभी टिप्पणियों पर विस्तृत प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। इसलिए पाठक द्वारा लगाए गए आरोपों को उनके राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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