उजाला /आगरा
ई-रजिस्ट्री प्रक्रिया के विरोध में आगरा जिले की सभी छह तहसीलों में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप वेंडर्स की हड़ताल बुधवार को चौथे दिन भी जारी रही। इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते न्यायिक और निबंधन कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तहसीलों में कामकाज पूरी तरह बंद होने के कारण संपत्ति की खरीद-फरोख्त से जुड़े सभी कार्य प्रभावित हुए हैं। रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। इसके अलावा विवाह पंजीकरण और अन्य जरूरी दस्तावेजों से संबंधित सेवाएं भी बाधित रहीं।
हड़ताल के दौरान विभिन्न संगठनों ने सरकार के फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए प्रतीकात्मक रूप से स्टांप राज्यमंत्री की ‘उठावनी सभा’ आयोजित की। इस दौरान अधिवक्ताओं और अन्य संबंधित लोगों ने ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। सदर तहसील परिसर में तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शंभूनाथ वर्मा की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें आंदोलन को और तेज करने की रणनीति तैयार की गई। महासचिव अरविंद कुमार दुबे ने बताया कि गुरुवार को निबंधन मंत्री के विरोध में एक रैली निकाली जाएगी। बैठक के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई और चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो इसका असर आगामी चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।
अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप वेंडर्स और तहसील सहायकों का कहना है कि 4 जून को जारी ई-रजिस्ट्री प्रक्रिया का आदेश उनकी पारंपरिक कार्यप्रणाली को प्रभावित करेगा। उनका आरोप है कि इस नई व्यवस्था से हजारों लोगों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है।संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार इस आदेश पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी और किसी भी प्रकार का निबंधन कार्य नहीं किया जाएगा। हड़ताल कर रहे संगठनों का दावा है कि पिछले तीन दिनों से रजिस्ट्री कार्य बंद रहने के कारण सरकार को करीब 6 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। वहीं दूसरी ओर, संपत्ति खरीदने और बेचने वाले लोगों के सौदे भी अटक गए हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई महत्वपूर्ण रियल एस्टेट डील्स रजिस्ट्री न होने के कारण लंबित पड़ी हैं, जिससे बाजार पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।हड़ताल सभा में दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष राम उपाध्याय, महासचिव आशू यादव, मुख्य संरक्षक रामकुमार रावत समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक, स्टांप वेंडर्स और तहसील सहायकों ने हिस्सा लिया।
सभी संगठनों ने एक स्वर में आंदोलन को जारी रखने का संकल्प लिया और सरकार से ई-रजिस्ट्री व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग दोहराई इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर आम जनता पर पड़ रहा है। जरूरी दस्तावेजों की रजिस्ट्री न होने के कारण लोगों के काम अटक गए हैं। खासकर वे लोग जो प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने की प्रक्रिया में हैं, उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब सभी की नजरें सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हैं, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकल सके।
