उजाला / मुरादाबाद:
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) ब्राह्मण समाज को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में शनिवार को मुरादाबाद के बुद्धि विहार स्थित व्हाइट हाउस में ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन किया गया। हालांकि, पार्टी का यह कार्यक्रम राजनीतिक संदेश देने से ज्यादा अपनी अंदरूनी खींचतान को लेकर चर्चा में आ गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बलिया से सपा सांसद सनातन पांडेय मौजूद रहे, जबकि मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा भी मंच पर दिखाई दीं। लेकिन सबसे अधिक चर्चा इस बात की रही कि जिले और मंडल के चारों सपा विधायक कार्यक्रम से पूरी तरह नदारद रहे। ऐसे में पार्टी के भीतर समन्वय और संगठनात्मक एकजुटता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कार्यक्रम में कांठ विधायक कमाल अख्तर, मुरादाबाद देहात विधायक नासिर कुरैशी, बिलारी विधायक फहीम इरफान और ठाकुरद्वारा विधायक नवाब जान में से कोई भी शामिल नहीं हुआ। भाजपा के खिलाफ 2027 के चुनाव में मंडल की छह विधानसभा सीटों पर मजबूत रणनीति बनाने की कोशिश कर रही सपा के लिए यह स्थिति असहज मानी जा रही है। राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह महज संयोग था या फिर पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों का संकेत।

सपा के जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव ने कहा कि सम्मेलन की सूचना सभी जनप्रतिनिधियों को समय पर भेजी गई थी। उनके अनुसार, कांठ विधायक कमाल अख्तर अमरोहा में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम में व्यस्त होने के कारण नहीं आ सके। वहीं मुरादाबाद देहात विधायक नासिर कुरैशी लखनऊ में होने की वजह से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए। वहीं जिलाध्यक्ष के दावे के बीच विधायक नासिर कुरैशी का बयान अलग तस्वीर पेश करता है। उन्होंने कहा कि वह पिछले कुछ दिनों से लखनऊ में हैं, लेकिन उन्हें इस सम्मेलन की व्यक्तिगत रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई। नासिर कुरैशी ने कहा कि संभव है सूचना उनके कार्यालय तक पहुंची हो, लेकिन उन्हें सीधे तौर पर कार्यक्रम के बारे में अवगत नहीं कराया गया। उनके इस बयान के बाद सूचना व्यवस्था और संगठनात्मक समन्वय पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
ठाकुरद्वारा विधायक नवाब जान ने बताया कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी थी, लेकिन यह किस तारीख को आयोजित होना है, इसकी पुष्टि नहीं थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी टीम को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा था, जबकि वह स्वयं किसी जरूरी कार्य से ढकिया गए हुए थे। उनका यह जवाब भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि इतने महत्वपूर्ण सम्मेलन में स्वयं विधायक की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण समाज को साधने के उद्देश्य से आयोजित इस सम्मेलन में विधायकों की अनुपस्थिति ने सपा की चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी जहां एक ओर सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत भी साफ दिखाई दे रही है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व की ओर से इसे सामान्य स्थिति बताया जा रहा है, लेकिन सम्मेलन में चारों विधायकों की गैरमौजूदगी राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।
