उजाला / देश
नई दिल्ली: देश की चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर जारी राजनीतिक घमासान अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन INDIA ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर ‘मॉक संसद’ का आयोजन किया। विपक्ष ने इस आयोजन को ‘जन महाभियोग’ नाम दिया है। इसके जरिए विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। दिल्ली के 10, राजाजी मार्ग स्थित मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। उन्होंने मॉक संसद में अध्यक्ष की भूमिका निभाई। इस आयोजन में INDIA गठबंधन के नेताओं के साथ नागरिक समाज के सदस्यों की भागीदारी भी रही। विपक्ष का उद्देश्य इस मंच के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया से जुड़े उन सवालों को उठाना है, जिन्हें लेकर वह लगातार चुनाव आयोग पर सवाल खड़े करता रहा है।
क्यों आयोजित की गई ‘जन महाभियोग’ मॉक संसद?
दरअसल, पिछले कुछ समय से विपक्षी दल मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मतदाता सूची के साथ गड़बड़ियां हो रही हैं और इसके जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी लगातार अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से न कटे और किसी भी नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े। इन्हीं मुद्दों को केंद्र में रखकर INDIA गठबंधन ने मॉक संसद के आयोजन का फैसला किया। विपक्ष इस मंच के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर सार्वजनिक बहस खड़ी करना चाहता है।
बारिश के कारण टला था कार्यक्रम
इस मॉक संसद का आयोजन पहले शुक्रवार, 30 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे किया जाना था। हालांकि, दिल्ली में लगातार हो रही बारिश के कारण कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा। इसके बाद इसे शनिवार, 31 अक्टूबर को आयोजित करने का फैसला लिया गया। कार्यक्रम की तारीख में बदलाव के बावजूद विपक्षी दलों ने आयोजन को लेकर अपनी तैयारियां जारी रखीं। शनिवार को खरगे के आवास पर मॉक संसद आयोजित की गई, जहां मीरा कुमार ने अध्यक्ष के तौर पर कार्यवाही की शुरुआत की।
पवन खेड़ा बोले- यह दिखावटी संसद नहीं, सार्वजनिक महाभियोग है
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने इस आयोजन को लेकर विपक्ष का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह कोई दिखावटी संसद नहीं है, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का सार्वजनिक महाभियोग है। पवन खेड़ा के मुताबिक, इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केवल INDIA गठबंधन के नेता ही नहीं, बल्कि नागरिक समाज के सदस्य भी उत्सुक हैं। उनका कहना था कि यह आयोजन लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को जनता के सामने रखने का एक माध्यम है। विपक्ष इस कार्यक्रम के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने की स्थिति में जनता के सामने जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की जानी चाहिए।
क्या है मॉक संसद का राजनीतिक संदेश?
राजनीतिक नजरिए से देखें तो INDIA गठबंधन की यह पहल केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। विपक्ष इसे चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में पेश कर रहा है। ‘जन महाभियोग’ नाम देकर विपक्ष ने इस आयोजन को राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का रूप देने की कोशिश की है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि खरगे के आवास पर आयोजित मॉक संसद एक राजनीतिक-सार्वजनिक आयोजन है। यह संसद में चलने वाली औपचारिक महाभियोग प्रक्रिया नहीं है और न ही इससे मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की कोई संवैधानिक प्रक्रिया शुरू होती है। अब देखने वाली बात होगी कि विपक्ष की इस पहल का राजनीतिक असर कितना व्यापक होता है और चुनाव आयोग की निष्पक्षता, SIR तथा कथित वोट चोरी के मुद्दे पर आगे किस तरह की बहस सामने आती है। फिलहाल, ‘जन महाभियोग’ के जरिए INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपने विरोध को एक नया राजनीतिक मंच दे दिया है।
