उजाला / देश
हरियाणा: देश के प्रमुख औद्योगिक और कॉरपोरेट केंद्रों में शामिल हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। एक तरफ कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोग परेशान हैं, तो दूसरी तरफ पानी की किल्लत, कारोबार में रुकावट और औद्योगिक उत्पादन प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी की एंट्री के विरोध में करीब 40 हजार बिजली कर्मचारी और इंजीनियर आंदोलन कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य के कई जिलों में बिजली संकट से करीब 10 लाख उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा है।
22 से 24 अक्टूबर तक राज्यव्यापी हड़ताल
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों ने 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। हड़ताल शुरू होते ही गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह समेत कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। बिजली से जुड़ी खराबियों को ठीक करने और उपभोक्ताओं की शिकायतों का निस्तारण करने में भी मुश्किलें आईं। गुरुग्राम में हड़ताल के शुरुआती 12 घंटों के दौरान तीन हजार से अधिक बिजली शिकायतें आने की जानकारी सामने आई। कई इलाकों में लंबे समय तक बिजली गुल रहने से घरों में पानी की मोटर, इंटरनेट और दूसरे जरूरी काम प्रभावित हुए। बिजली पर निर्भर औद्योगिक इकाइयों में भी उत्पादन बाधित होने की खबरें आईं।
फरीदाबाद में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कुछ स्कूलों की ओर से अभिभावकों को छुट्टी का संदेश भेजे जाने की जानकारी सामने आई। वहीं, गुरुग्राम की राजेंद्रा पार्क कॉलोनी में बिजली संकट से नाराज लोगों ने रेलवे रोड पर जाम लगा दिया। फरीदाबाद के कई इलाकों में भी लोगों ने प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की।
निजी कंपनी को लाइसेंस देने का क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी की भागीदारी को लेकर है। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) ने गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का फैसला किया है। बिजली कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस फैसले से सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था कमजोर हो सकती है। कर्मचारियों को आशंका है कि भविष्य में उनकी नौकरियों, सेवा शर्तों और विभाग की कार्यप्रणाली पर इसका असर पड़ सकता है। साथ ही, उपभोक्ताओं के हितों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
कर्मचारी संगठन इसी फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनका विरोध निजी कंपनी को बिजली वितरण का अधिकार दिए जाने के खिलाफ है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि समानांतर वितरण लाइसेंस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि पूरा बिजली विभाग तत्काल निजी हाथों में चला गया है। विवाद इस बात को लेकर है कि सरकारी वितरण व्यवस्था के साथ निजी कंपनी के काम करने से भविष्य में बिजली क्षेत्र की संरचना और सेवाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
आम जनता और कारोबार पर पड़ रहा असर
बिजली कर्मचारियों और सरकार के बीच चल रहे विवाद का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर दिखाई दे रहा है। बिजली गुल होने से घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। पानी की मोटर नहीं चलने से पेयजल और दैनिक जरूरतों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। इंटरनेट और बिजली पर निर्भर दूसरे काम भी बाधित हो रहे हैं।
औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से उत्पादन और कारोबार को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में हड़ताल का असर केवल बिजली विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि आम परिवारों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और उद्योगों तक पहुंच रहा है।
सरकार की अपील की तैयारी, समाधान पर टिकी निगाहें
इस मामले में हरियाणा सरकार ने नियामक आयोग के फैसले को चुनौती देने के लिए अपील करने की बात कही है। दूसरी ओर, कर्मचारी संगठनों की मांग है कि निजी वितरण लाइसेंस के फैसले को वापस लेने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकल पाएगा? क्या हड़ताल समाप्त होने के बाद बिजली आपूर्ति सामान्य हो सकेगी, या विवाद आगे भी जारी रहेगा?
फिलहाल, बिजली संकट से जूझ रहे लोगों को राहत दिलाना सबसे बड़ी चुनौती है। निजीकरण हो या सरकारी व्यवस्था, बिजली उपभोक्ताओं की प्राथमिक जरूरत निर्बाध और भरोसेमंद आपूर्ति है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच चल रही इस लड़ाई में आम जनता को राहत कब मिलेगी, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। बिजली वितरण व्यवस्था में बदलाव को लेकर सरकार और कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद का समाधान आखिर कब निकलेगा, ताकि आम लोगों को अंधेरे और पानी की किल्लत से राहत मिल सके?
