मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को मिली फांसी

MUSKAN-SAHIL

उजाला / उत्तरप्रदेश

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने आरोपी मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। नीले ड्रम में सौरभ के शव के टुकड़े छिपाने के कारण चर्चित हुए इस मामले में फैसला आने के बाद एक बार फिर यह हत्याकांड सुर्खियों में है। पीड़ित पक्ष के वकील कृष्ण कुमार दुबे ने अदालत में हुई कार्यवाही, बचाव पक्ष की दलीलों और फैसला सुनाए जाने के दौरान दोनों दोषियों की प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह समाज को अपराध के खिलाफ कड़ा संदेश देता है।

धारा 302 और 238ए के तहत जुर्माना भी लगाया

पीड़ित पक्ष के वकील कृष्ण कुमार दुबे के मुताबिक, अदालत ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाने के साथ भारतीय दंड कानून की संबंधित धाराओं के तहत जुर्माना भी लगाया। उन्होंने बताया कि धारा 302 के तहत 50 हजार रुपये और धारा 238ए के तहत 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, इन धाराओं और जुर्माने के सटीक विवरण की पुष्टि अदालत के लिखित फैसले से की जानी चाहिए। वकील ने कहा कि इस मामले पर पूरे देश की निगाहें थीं। अदालत का फैसला अपराध की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आया है। उनके मुताबिक, यह निर्णय उन लोगों के लिए चेतावनी है जो लालच या किसी अन्य कारण से गंभीर अपराध करने की सोचते हैं।

कोर्ट में महाभारत का उदाहरण देकर क्या कहा गया?

कृष्ण कुमार दुबे ने बताया कि सुनवाई के दौरान महाभारत का भी उल्लेख किया गया। उनके अनुसार, अदालत में यह बात रखी गई कि अपराध के अनुरूप दंड देना भी धर्म और न्याय का हिस्सा है। इसका आशय यह था कि किसी अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए। वकील ने इस फैसले को न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि समाज में कानून के प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए गंभीर अपराधों में न्याय होना जरूरी है। उनके मुताबिक, अदालत ने मामले के तथ्यों और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया।

फैसले के वक्त मुस्कान और साहिल की कैसी थी प्रतिक्रिया?

पीड़ित पक्ष के वकील के अनुसार, फैसला सुनाए जाने के बाद मुस्कान और साहिल की बॉडी लैंग्वेज में बदलाव दिखाई दिया। उन्होंने दावा किया कि दोनों को सजा सुनकर झटका लगा और वे सदमे जैसी स्थिति में नजर आए। वकील ने बताया कि बचाव पक्ष की ओर से भी अदालत में कई दलीलें दी गई थीं। बचाव पक्ष ने यह तर्क रखा था कि किसी ने दोनों को प्रत्यक्ष रूप से हत्या करते हुए नहीं देखा। इसके अलावा, दोनों की बेटियां होने का हवाला देते हुए भी नरमी बरतने की बात कही गई थी। हालांकि, कृष्ण कुमार दुबे के मुताबिक, अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने ऐसे साक्ष्य पेश किए, जिनके आधार पर अपराध साबित हुआ। अदालत ने मामले की परिस्थितियों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद दोषियों को कठोरतम सजा सुनाई।

सोची-समझी साजिश और शव को छिपाने का मामला

इस हत्याकांड में सजा की गंभीरता को लेकर वकील ने कहा कि उनके अनुसार, हत्या अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सोची-समझी साजिश थी। सौरभ राजपूत की हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में छिपाया गया। इसी वजह से यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना। वकील ने दलील दी कि अपराध को अंजाम देने के बाद शव को छिपाने की कोशिश मामले की गंभीरता को दर्शाती है। उनके मुताबिक, इन्हीं परिस्थितियों और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को देखते हुए फांसी की सजा उचित है। हालांकि, सजा के औपचारिक आधार और अदालत की विस्तृत टिप्पणियों के लिए लिखित निर्णय देखना महत्वपूर्ण होगा।

महिला को फांसी की सजा और बेटी को लेकर चर्चा

कृष्ण कुमार दुबे ने कहा कि किसी महिला को मौत की सजा सुनाया जाना अपने आप में इस मामले को विशेष चर्चा में लाता है। उन्होंने मुस्कान की बेटी का जिक्र करते हुए कहा कि बच्ची के भविष्य और उसकी परवरिश का प्रश्न भी संवेदनशील है। वकील के अनुसार, बच्ची छह साल तक अपनी मां के साथ रह सकती है। इस मामले में बच्ची की देखभाल और भविष्य से जुड़े पहलू भावनात्मक जरूर हैं, लेकिन अदालत का फैसला अपराध और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है। इस हत्याकांड में सुनाई गई सजा के बाद अब अदालत के विस्तृत फैसले और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

 

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