उजाला / उत्तरप्रदेश
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को बॉन्डेड MBBS डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन उस समय चर्चा में आ गया, जब प्रदर्शनकारी महिला डॉक्टर पुलिस की बस के आगे लेट गईं। डॉक्टरों ने पुलिस की गाड़ी रोकते हुए कहा कि अब गाड़ी चढ़ा दो, लेकिन वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगी। पिछले करीब 40 दिनों से आंदोलन कर रहे डॉक्टरों का आरोप है कि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक शासनादेश जारी नहीं किया गया है। मंगलवार दोपहर हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के पास डॉक्टर वेतन में समानता की मांग को लेकर नारेबाजी कर रही थीं। इसी दौरान पुलिस टीम उन्हें हिरासत में लेने के लिए बस लेकर पहुंची। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को हिरासत में लिया, लेकिन इसी बीच कई डॉक्टर बस के आगे लेट गईं। कुछ डॉक्टरों ने बस को हाथों से धक्का देकर रोकने की कोशिश भी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
2018, 2019 और 2020 बैच के डॉक्टर कर रहे प्रदर्शन
यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े 2018, 2019 और 2020 बैच के बॉन्डेड MBBS डॉक्टर कर रहे हैं। डॉक्टरों का आरोप है कि समान MBBS डिग्री, बॉन्ड और सेवा की शर्तें होने के बावजूद उन्हें अलग-अलग वेतन दिया जा रहा है। इसी कथित असमानता को दूर करने के लिए वे समान वेतनमान लागू करने और बकाया एरियर का भुगतान करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के मुताबिक, बॉन्ड सेवा के तहत उन्हें दो वर्ष तक अनिवार्य सेवा देनी होती है या 10 लाख रुपये के बॉन्ड की बाध्यता का सामना करना पड़ता है। इस व्यवस्था के अंतर्गत डॉक्टर ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तथा अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं देते हैं।

डॉक्टरों का दावा है कि उन्हें इस सेवा के बदले करीब 50 से 55 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है, जबकि समान डिग्री और बॉन्ड के तहत सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में सेवा दे रहे कुछ डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपये प्रतिमाह तक पारिश्रमिक मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस अंतर को समाप्त कर सभी पात्र डॉक्टरों के लिए समान वेतन व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
2 सितंबर को ब्रजेश पाठक ने दिया था आश्वासन
डॉक्टरों के मुताबिक, 2 सितंबर को भी हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर वेतन असमानता के विरोध में प्रदर्शन किया गया था। उस दौरान डॉक्टर नारेबाजी करते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मुलाकात की मांग पर अड़े थे। करीब एक घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद डिप्टी सीएम बारिश में भीगते हुए गांधी प्रतिमा पहुंचे और डॉक्टरों से लगभग 20 मिनट तक बातचीत की। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि बातचीत के दौरान ब्रजेश पाठक ने उन्हें बताया था कि उनकी मांगों से संबंधित पत्रावली पूरी हो चुकी है। उन्होंने अगले दिन दोपहर दो बजे तक समान वेतन सहित अन्य मांगों को पूरा करने के लिए शासनादेश जारी होने का भरोसा दिया था। इस आश्वासन के बाद डॉक्टरों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया था। हालांकि, डॉक्टरों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद 40 दिन बीत जाने के बाद भी शासनादेश जारी नहीं हुआ। उनका कहना है कि यदि मांगों से संबंधित प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, तो अब तक आदेश जारी हो जाना चाहिए था।
समान वेतन और एरियर भुगतान की मांग पर अड़े डॉक्टर
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांग वेतन में समानता लागू करना और बकाया एरियर का भुगतान करना है। उनका कहना है कि समान योग्यता और समान सेवा की शर्तों के बावजूद वेतन में इतना अंतर होना उनके साथ अन्याय है। डॉक्टरों ने डिप्टी सीएम पर वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई। अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार उनकी मांगों पर क्या निर्णय लेती है और वेतन असमानता से जुड़े विवाद के समाधान के लिए शासनादेश कब तक जारी किया जाता है। फिलहाल, 40 दिनों से जारी आंदोलन के बीच मंगलवार को पुलिस की बस के आगे डॉक्टरों के लेटने की घटना ने बॉन्डेड डॉक्टरों की मांगों और वेतन असमानता के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।
