उजाला / दिल्ली
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास ने हिरासत से रिहा होने के बाद दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उन्हें और पार्टी के अन्य नेताओं को बिना पर्याप्त जानकारी दिए हिरासत में लिया गया। दास ने फोन जब्त किए जाने, वकील से संपर्क नहीं करने देने और हिरासत के दौरान कथित दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए। दरअसल, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने के बाद हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। 11 अक्टूबर को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किए जाने के बाद तीनों नेताओं को रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर हुई।
फोन जब्त करने और वकील से संपर्क नहीं देने का आरोप
रिहाई के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए सौरव दास ने दावा किया कि हिरासत के दौरान पुलिस ने उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए। उनके मुताबिक, उन्होंने फोन जब्त करने से संबंधित दस्तावेज यानी जब्ती मेमो मांगा, लेकिन उन्हें यह उपलब्ध नहीं कराया गया। दास ने यह भी आरोप लगाया कि तीनों नेताओं को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया और उन्हें अपने वकीलों से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि उनके फोन 25 घंटे से अधिक समय तक पुलिस के पास रहे। इसी वजह से उन्हें आशंका है कि फोन का डेटा एक्सेस किया गया होगा, डिवाइस की क्लोनिंग या हैकिंग की गई होगी अथवा उसमें सबूत डाले गए होंगे।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
सौरव दास ने राजधानी में प्रदर्शन से पहले किए गए सुरक्षा इंतजामों की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध और सड़कों पर पाबंदियों के जरिए प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना आपातकाल जैसी स्थिति से करते हुए कहा कि युवा नागरिक सरकार और चुनाव व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाना चाहते हैं, लेकिन उनकी आवाज दबाई जा रही है। दास ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखने की अपील की।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
CJP का प्रस्तावित प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है। पार्टी और उसके समर्थक चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। दास ने अपने बयान में सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने और युवाओं की आवाज रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सरकार इतनी सतर्क क्यों है। हालांकि, उनके इन राजनीतिक आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है।
पुलिस के जवाब पर टिकी नजरें
इस पूरे मामले में अब फोन जब्त किए जाने, हिरासत की प्रक्रिया और वकील से संपर्क की अनुमति नहीं मिलने जैसे आरोपों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में इन विशिष्ट आरोपों पर दिल्ली पुलिस का विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है। सौरव दास के बयान के बाद यह मामला केवल प्रदर्शन की अनुमति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि हिरासत के दौरान अधिकारों, पुलिस की जवाबदेही और डिजिटल उपकरणों की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी चर्चा में आ गए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि संबंधित आरोपों की जांच होती है या नहीं और पुलिस इस मामले में क्या पक्ष रखती है।
