BJP ने 8 नए चेहरों पर लगाया दांव

UTTAR PRADESH

उजाला / उत्तरप्रदेश

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अपने आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा की इस सूची को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिहाज से सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है। भाजपा ने इस बार अपने उम्मीदवारों के चयन में जातीय संतुलन के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, संगठन में सक्रियता और नए चेहरों को प्राथमिकता दी है। खास बात यह है कि पार्टी ने इस बार सभी आठ सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया है।

सामाजिक समीकरण पर भाजपा का फोकस

भाजपा की घोषित सूची में OBC, SC और सामान्य वर्ग के बीच संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई देती है। सूची में तीन OBC, दो अनुसूचित जाति और तीन सामान्य वर्ग के उम्मीदवार शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं, दो महिला चेहरों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। OBC वर्ग में लोधी, पाल और कुर्मी समुदाय को जगह दी गई है। धर्मपाल सिंह लोधी बिरादरी से आते हैं और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वहीं प्रकाश पाल पार्टी संगठन में क्षेत्रीय मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और पाल समुदाय से आते हैं। दलित समाज से आने वाले विद्यासागर सोनकर भाजपा के पुराने और अनुभवी नेताओं में शामिल रहे हैं। वह पूर्व विधान परिषद सदस्य और मछलीशहर से पूर्व सांसद रह चुके हैं। संगठन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और पार्टी के पूर्व महामंत्री रह चुके हैं। सामान्य वर्ग से राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय को ब्राह्मण प्रतिनिधित्व के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि राम प्रताप सिंह चौहान को राजपूत वर्ग से जोड़ा जा रहा है।

श्रुति गंगवार पर भाजपा का बड़ा दांव

भाजपा की सूची में सबसे ज्यादा चर्चा बरेली से आने वाली श्रुति गंगवार की हो रही है। पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और बरेली से लंबे समय तक सांसद रहे संतोष गंगवार की बेटी को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। संतोष गंगवार बरेली की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। वह आठ बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें झारखंड का राज्यपाल बनाया और अब उनकी बेटी श्रुति गंगवार को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने एक बार फिर गंगवार परिवार को महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिका दी है।

श्रुति गंगवार
श्रुति गंगवार

श्रुति गंगवार की उम्मीदवारी को रूहेलखंड क्षेत्र में कुर्मी समुदाय के बीच भाजपा की पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर समेत रूहेलखंड के कई इलाकों में कुर्मी मतदाताओं की महत्वपूर्ण मौजूदगी है। श्रुति गंगवार की पहचान एक शिक्षित और पेशेवर महिला के तौर पर भी रही है। आईआईटी पृष्ठभूमि से जुड़ी श्रुति गंगवार सामाजिक गतिविधियों के साथ-साथ अर्बन कोऑपरेटिव बैंक से भी जुड़ी रही हैं। राज्यसभा प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने उन्हें औपचारिक राजनीति में बड़ा अवसर दिया है।

PDA की राजनीति के बीच भाजपा की रणनीति

समाजवादी पार्टी लगातार PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बना रही है। ऐसे में भाजपा की राज्यसभा सूची में OBC और SC समुदायों को प्रतिनिधित्व देना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा के उम्मीदवारों में अलग-अलग सामाजिक वर्गों के साथ महिलाओं और नए चेहरों को शामिल करने की कोशिश भी दिखाई देती है। पार्टी की यह रणनीति 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

पुराने चेहरों को नहीं मिला मौका

भाजपा ने इस बार कई मौजूदा और पुराने नेताओं को राज्यसभा के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है। इनमें अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, बीएल वर्मा, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, बृजलाल, दिनेश शर्मा और गीता शाक्य जैसे नाम शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का नाम भी नई सूची में नहीं है। वहीं दिनेश शर्मा वर्तमान में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल हैं।

आगरा से राम प्रताप सिंह चौहान

भाजपा ने आगरा से राम प्रताप सिंह चौहान को भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। उनके चयन के जरिए पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र को भी प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। कुल मिलाकर भाजपा की आठ उम्मीदवारों वाली सूची में सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन, महिला प्रतिनिधित्व और नए चेहरों का मिश्रण नजर आता है। श्रुति गंगवार जैसे युवा और पेशेवर चेहरे को मौका देकर भाजपा ने एक तरफ गंगवार परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया है, तो दूसरी तरफ OBC वर्ग के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने का संदेश भी दिया है। अब 16 अक्टूबर के राज्यसभा चुनाव में इन उम्मीदवारों की जीत के साथ भाजपा की यह रणनीति कितनी सफल होती है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

 

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