उजाला / लखनऊ : लखनऊ में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को विरोध-प्रदर्शन किया। हजरतगंज इलाके में प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक *‘अस्थिकलश यात्रा’* निकाली और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर नारेबाजी की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने और उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद मौके पर धक्का-मुक्की और नोकझोंक की स्थिति बन गई।
जनपथ मार्केट के पास जुटे कार्यकर्ता
जानकारी के मुताबिक, सपा कार्यकर्ता दोपहर करीब 12 बजे जनपथ मार्केट के पास एकत्र हुए थे। यहां से कार्यकर्ता विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने हजरतगंज में उन्हें रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। इससे पहले भी लखनऊ में सपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से इसी मुद्दे पर प्रदर्शन हो चुके हैं।

सड़क पर लेट गए प्रदर्शनकारी
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद कई प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और कुछ कार्यकर्ता जमीन पर लेट गए। पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने और हिरासत में लेने की कोशिश की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने बाद में प्रदर्शनकारियों को एक-एक कर उठाकर वाहनों में बैठाया और ईको गार्डन भेज दिया। स्थानीय रिपोर्टों में करीब तीन दर्जन युवा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही गई है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और प्रदर्शन से जुड़े दृश्यों में पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाते हुए देखा गया। प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर अभद्रता करने और कपड़े फाड़ने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर प्रदर्शन
सपा कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पार्टी की ओर से चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध जताया जा रहा है। इससे पहले 28 सितंबर को भी हजरतगंज में सपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए ज्ञानेश कुमार के पुतले पर कालिख पोती थी। उस दौरान भी पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजा था।

वहीं, 25 सितंबर को कांग्रेस ने भी लखनऊ में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोककर हिरासत में लिया था और उन्हें ईको गार्डन ले जाया गया था।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को ईको गार्डन भेजा
हजरतगंज में काफी देर तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया। पुलिस की ओर से प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए इलाके में अफरातफरी की स्थिति भी बनी।
फिलहाल यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े राजनीतिक विवाद के बीच हुआ है। *‘वोट चोरी’ से जुड़े आरोप सपा और अन्य विपक्षी दलों की ओर से लगाए जा रहे हैं; इन आरोपों को राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।* चुनाव आयोग की ओर से इन राजनीतिक आरोपों पर अलग-अलग मौकों पर अपना पक्ष रखा गया है।
