आगरा जनपद के जगनेर थाना क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अपनी ही कार चोरी की साजिश रचने के आरोप में भाजपा मंडल अध्यक्ष देवकी नंदन उर्फ सोनू शर्मा को कोर्ट में सरेंडर करना पड़ा। गुरुवार को आरोपी ने अदालत में आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद न्यायालय ने उसे तत्काल न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। यह पूरा मामला वर्ष 2024 का है, जब जगनेर थाना क्षेत्र में बोलेरो गाड़ी (संख्या: UP 80 ET 1679) चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। हैरानी की बात यह रही कि इस मामले में खुद देवकी नंदन उर्फ सोनू शर्मा ही वादी बने थे और उन्होंने ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने काफी समय तक गाड़ी की तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई।
हालांकि, कहानी में असली मोड़ तब आया जब कागारौल पुलिस ने एक अलग जांच के दौरान इस केस की परतें खोलनी शुरू कीं। जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सभी को हैरान कर दिया। पुलिस को पता चला कि जिस व्यक्ति ने गाड़ी चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, वही इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य आरोपी है। जांच में खुलासा हुआ कि देवकी नंदन ने इस बोलेरो गाड़ी को पहले ही जगनेर निवासी दीपक कुमार मंगल को बेच दिया था और उससे पूरी रकम भी ले ली थी। लेकिन उसने गाड़ी का ट्रांसफर दीपक के नाम नहीं कराया। इसके बाद आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए उसने अपने सगे भाई मनमोहन शर्मा उर्फ छोटू के साथ मिलकर गाड़ी को दोबारा हासिल करने की साजिश रची।
साजिश के तहत देवकी नंदन ने आगरा के भगवान टॉकीज क्षेत्र से गाड़ी की नकली चाबी बनवाई। इसके बाद अपने भाई के साथ मिलकर दीपक के घर के बाहर खड़ी गाड़ी को चोरी करवा दिया। चोरी के बाद दोनों भाइयों ने इस गाड़ी को जयपुर के एक खरीदार पुनीत सिरोही को बेच दिया। पुलिस ने जब इस मामले की गहराई से जांच की तो टोल टैक्स के मैसेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम को जोड़ा। करीब 400 पन्नों की चार्जशीट में दोनों भाइयों की साजिश और उनकी भूमिका को विस्तार से उजागर किया गया। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत ने आरोपियों को समन और नोटिस जारी किए, लेकिन गिरफ्तारी के डर और राजनीतिक प्रभाव के चलते दोनों आरोपी लगातार अदालत में पेश होने से बचते रहे। इस बीच उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन भी किया, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया।
स्थिति और गंभीर तब हो गई जब अदालत ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। इसके बावजूद आरोपी कानून से बचने की कोशिश करता रहा। हाल ही में देवकी नंदन ने अपर जिला जज की अदालत में अग्रिम जमानत की एक और अर्जी दाखिल की, जिसे न्यायालय ने सख्ती से खारिज कर दिया। कानूनी शिकंजा कसता देख अंततः देवकी नंदन उर्फ सोनू शर्मा ने गुरुवार को अदालत में सरेंडर कर दिया। अदालत ने बिना देरी किए उसे न्यायिक हिरासत में भेजते हुए जेल भेजने का आदेश दिया। इस मामले में सरकारी वकील के साथ-साथ डॉ. रवि अरोरा एडवोकेट ने भी अहम भूमिका निभाई और अदालत में प्रभावी पैरवी की। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है और अन्य संभावित कड़ियों की भी जांच जारी है।
