यूपी पुलिस में बड़ा फेरबदल: 206 सीओ के तबादले

UTTARPRADESH

उजाला : उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 206 क्षेत्राधिकारियों (सीओ) का तबादला कर दिया। इस व्यापक ट्रांसफर लिस्ट में मेरठ सहित कई जिलों के अधिकारी शामिल हैं। इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और मजबूत व प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। मेरठ जिले में तैनात सीओ सिविल लाइन शुचिता सिंह का तबादला कर उन्हें सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के पद पर गाजियाबाद भेजा गया है। वहीं, सीओ कोतवाली अभिषेक पटेल को अलीगढ़ में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।इसके अलावा कासगंज में तैनात सीओ संदीप वर्मा का स्थानांतरण मेरठ मंडल में किया गया है। वहीं गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट में तैनात सहायक पुलिस आयुक्त सौम्या सिंह को मेरठ में सीओ बनाकर भेजा गया है। इन तबादलों के बाद मेरठ में नई पुलिस टीम का गठन हो गया है।

हमीरपुर से मेरठ पीटीएस भेजी गईं विनीता : इस फेरबदल के तहत हमीरपुर में तैनात अधिकारी विनीता को पीटीएस मेरठ में नई तैनाती दी गई है। इससे साफ है कि सरकार ने प्रदेशभर में संतुलन बनाते हुए अधिकारियों की तैनाती की है।

लंबे समय से मेरठ में थीं तैनात शुचिता सिंह : सीओ शुचिता सिंह काफी लंबे समय से मेरठ में तैनात थीं। उनकी पोस्टिंग एसएसपी रोहित सिंह सजवाण के कार्यकाल में हुई थी। इसके बाद उन्होंने डॉ. विपिन ताडा और वर्तमान एसएसपी अविनाश पांडेय के कार्यकाल में भी अपनी सेवाएं दीं। लंबे समय बाद अब उनका ट्रांसफर किया गया है।

विवादों में भी रहा नाम : करीब एक महीने पहले परशुराम जयंती के अवसर पर निकाले जा रहे जुलूस के दौरान शुचिता सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में वे ब्राह्मण समाज के युवकों को फरसा लेकर चलने पर मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी देती नजर आई थीं। उन्होंने कहा था कि “जो भी फरसा लहरा रहे हैं, सब रिकॉर्डिंग हो रही है, सब पर मुकदमा होगा। इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया था। ब्राह्मण समाज के कई नेताओं और संगठनों ने नाराजगी जताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

भेदभाव के आरोप भी लगे : विवाद बढ़ने पर कुछ लोगों ने शुचिता सिंह पर जातिगत भेदभाव के आरोप भी लगाए। आरोप था कि ठाकुर समाज से होने के कारण उन्होंने ब्राह्मण युवकों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया। इस मुद्दे पर कई राजनीतिक नेताओं, खासकर भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं ने भी नाराजगी जाहिर की थी।

कानून-व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश :प्रदेश सरकार द्वारा किए गए इस बड़े पैमाने पर तबादले को प्रशासनिक सुधार और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों के फेरबदल से कार्यक्षमता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर बेहतर पुलिसिंग सुनिश्चित करने की उम्मीद जताई जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नए अधिकारियों की तैनाती से संबंधित जिलों में कानून-व्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।

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