228 करोड़ की सीवेज परियोजना शुरू

UTTARPRADESH

उजाला/ मुरादाबाद

मुरादाबाद:  शहर में सीवेज निस्तारण की लंबे समय से चली आ रही समस्या को दूर करने की दिशा में 228 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना अब जमीन पर उतरने जा रही है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाना नहीं, बल्कि शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकलने वाले नालों के पानी को व्यवस्थित तरीके से उपचारित करना है, ताकि प्रदूषित पानी सीधे रामगंगा नदी में न पहुंच सके।

परियोजना के तहत जोन-3 और जोन-4 के नालों को चिह्नित कर उन्हें आपस में जोड़ने और इंटरसेप्शन-डायवर्जन व्यवस्था के जरिए सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम से जोड़ने की योजना है। इसके बाद नालों से निकलने वाले गंदे पानी को निर्धारित प्रणाली के माध्यम से उपचारित किया जाएगा। इससे सामान्य दिनों के साथ-साथ बारिश के दौरान नालों के जरिए नदी की ओर जाने वाले प्रदूषित पानी को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। परियोजना का प्रमुख हिस्सा बुद्धि विहार सेक्टर-9 में बनने वाला 15 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट है। 15 एमएलडी यानी प्लांट प्रतिदिन करीब 1.5 करोड़ लीटर तक सीवेज के उपचार की क्षमता रखेगा। एसटीपी के साथ नालों के इंटरसेप्शन और डायवर्जन नेटवर्क तथा अन्य जरूरी सहायक ढांचे का निर्माण भी परियोजना में शामिल है।

मुरादाबाद के लिए यह परियोजना इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकलने वाला सीवेज कई नालों के माध्यम से नदी की ओर पहुंचता है। नालों को एसटीपी से जोड़ने के बाद सीवेज के उपचार की व्यवस्था एक निर्धारित नेटवर्क के तहत होगी। इससे नदी में बिना उपचारित पानी की सीधी निकासी को कम करने में मदद मिल सकती है और सीवेज प्रबंधन की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। परियोजना में केवल निर्माण कार्य ही शामिल नहीं है। एसटीपी के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी इसका हिस्सा है। इसके लिए 15 वर्षों तक संचालन और रखरखाव का प्रावधान रखा गया है। यानी प्लांट तैयार होने के बाद उसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी परियोजना की निर्धारित व्यवस्था के तहत निभाई जाएगी।

इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी आधारित पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर तैयार किया गया है। इसके जरिए सीवेज उपचार के लिए जरूरी आधारभूत ढांचे के निर्माण के साथ उसके लंबे समय तक संचालन पर भी ध्यान दिया गया है। नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल के मुताबिक, परियोजना का अगला महत्वपूर्ण चरण कार्यादेश जारी होने के बाद शुरू होगा। इसके बाद जोन-3 और जोन-4 के नालों की पहचान, इंटरसेप्शन-डायवर्जन नेटवर्क, एसटीपी निर्माण और उससे जुड़े सहायक कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।

परियोजना पूरी होने के बाद इसका असर मुरादाबाद की सीवेज प्रबंधन व्यवस्था, नदी प्रदूषण नियंत्रण और शहरी स्वच्छता पर पड़ने की उम्मीद है। नालों के पानी को अलग-अलग स्थानों पर रोककर उपचारित करने की व्यवस्था बनने से रामगंगा में प्रदूषित पानी की सीधी आमद को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इससे शहर में सीवेज निस्तारण की मौजूदा व्यवस्था को अधिक संगठित रूप देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *