जवाहर भवन आग बुझ गई, लेकिन 58 दिन बाद भी मलबा नहीं हटा, उठे सवाल

उजाला / लखनऊ: जवाहर भवन की चौथी मंजिल पर 20 जुलाई को भीषण अग्निकांड हुआ था। दमकल विभाग ने आग पर काबू पा लिया, लेकिन 16 सितंबर तक घटनास्थल की तस्वीरें और वीडियो हादसे के बाद की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। जन एक्सप्रेस के कैमरे में सामने आई तस्वीरों में चौथी मंजिल पर जली हुई फाइलें, राख, क्षतिग्रस्त सामान और मलबा दिखाई दे रहा है।

आग बुझने के 58 दिन बाद भी यदि घटनास्थल पर मलबा मौजूद है, तो सवाल उठता है कि हादसे के बाद प्रभावित हिस्से की सफाई, सुरक्षा, जांच और क्षतिग्रस्त सामान के निस्तारण की प्रक्रिया कहां तक पहुंची?

58 दिन बाद भी मलबा क्यों नहीं हटा?

20 जुलाई को आग लगी और 16 सितंबर तक 58 दिन गुजर गए। ऐसे में पहला सवाल यही है कि इतने लंबे समय के बाद भी जला हुआ मलबा मौके पर क्यों पड़ा है? आग बुझने के बाद चौथी मंजिल को सुरक्षित और व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी किस विभाग या अधिकारी की थी?

जली फाइलों और सरकारी दस्तावेजों का क्या हुआ?

मौके की तस्वीरों में जली हुई फाइलें और क्षतिग्रस्त सामान दिखाई दे रहा है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आग से प्रभावित सरकारी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने, उनकी जांच करने और नियमानुसार निस्तारण के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई।

क्या इस संबंध में कोई आधिकारिक कार्रवाई शुरू हुई है? यदि हुई है तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है?

क्या संरचनात्मक जांच पूरी हुई?

आग से प्रभावित चौथी मंजिल की संरचनात्मक सुरक्षा भी महत्वपूर्ण सवाल है। क्या भवन के प्रभावित हिस्से की तकनीकी या संरचनात्मक जांच पूरी की गई? अगर जांच हुई है तो रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आए? और अगर जांच अभी पूरी नहीं हुई है तो 58 दिन की देरी की वजह क्या है?

साथ ही यह भी सवाल है कि क्या चौथी मंजिल पर कर्मचारियों या अन्य लोगों की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित है।

इलेक्ट्रिकल और फायर सेफ्टी की दोबारा जांच हुई?

आग की शुरुआत विद्युत जंक्शन बॉक्स में शॉर्ट सर्किट से होने की बात सामने आई थी। ऐसे में हादसे के बाद पूरे जवाहर भवन की इलेक्ट्रिकल और फायर सेफ्टी व्यवस्था की दोबारा जांच हुई या नहीं, यह भी अहम सवाल है।

अगर जांच हुई है तो उसकी रिपोर्ट क्या कहती है? क्या भवन में किसी तरह के सुधार या सुरक्षा उपाय किए गए? और यदि जांच नहीं हुई तो इसकी वजह क्या है?

क्या 58 दिनों में नियमित निरीक्षण हुआ?

हादसे के बाद घटनास्थल का नियमित निरीक्षण किया गया या नहीं, यह भी जवाबदेही से जुड़ा सवाल है। अगर निरीक्षण हुआ तो मलबा हटाने और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित करने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई? वहीं, अगर नियमित निरीक्षण नहीं हुआ तो निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी?

सरकारी भवन में आग लगने के बाद प्रभावित हिस्से की सुरक्षा, सफाई, जांच और फायर सेफ्टी की समीक्षा महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं हैं। ऐसे में जवाहर भवन की चौथी मंजिल की मौजूदा स्थिति इन सभी पहलुओं पर सवाल खड़े करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *